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कर्ज से दबी आरकॉम पर हो सकता है बैंकों का कब्जा

मुंबई, 31 अक्टूबर (हि.स.)। कर्ज में डूबी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) ने कंपनी को उबारने के लिए नई योजना पेश की है। रिलायंस ने मोबाइल सेवा प्रदाता एयरसेल के साथ विलय करने का निर्णय लिया है। करीब 45 हजार करोड़ रुपये के कर्ज से उबरने के लिए आरकॉम ने बैंकों को करीब सात हजार करोड़ रुपये की इक्विटी देने के साथ ही शेयर बहुलांश देने का भी प्रस्ताव दिया है। अगर आरकॉम का मौजूदा प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है तो भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले कर्ज दाता बैंकों के पास कंपनी की 51 फीसदी हिस्सेदारी हो जाएगी और कंपनी के प्रमोटरों के पास करीब 26 हिस्सेदारी बचेगी।

कर्ज चुकाने की योजना में आरकॉम की परिसंपत्तियों को बेचने का भी प्रस्ताव है। कंपनी करीब 17 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति बेचकर कर्ज की भरपाई कर सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार आरकॉम के कार्यकारी निदेशक पुनीत गर्ग ने बताया कि इन परिसंपत्तियों की कीमत 30 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है लेकिन कम से कम 17 हजार करोड़ रुपये इससे जरूर मिल जाएंगे।

कंपनी ने जिन परिसंपत्तियों को बेचने का प्रस्ताव दिया है उनमें नवी मुंबई स्थित धीरूभाई अंबानी नॉलेज सेंटर भी है। कंपनी ने 122 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम भी देने की बात कही है, जिसकी कीमत करीब 14 हजार करोड़ रुपये है। कंपनी के पास करीब सात हजार करोड़ रुपये के मोबाइल नेटवर्क टॉवर, करीब तीन हजार करोड़ रुपये का फाइबर नेटवर्क और चार हजार करोड़ रुपये के डेटा सेंटर हैं। आरकॉम के पास कर्ज चुकाने के लिए दिसंबर 2018 तक का वक्त है लेकिन कंपनी मार्च 2018 तक इसे चुकाने की योजना बना रही है। आरकॉम ने अपने सैकड़ों कर्मचारियों को पहले ही 30 नवंबर तक का नोटिस दे दिया है। कंपनी ने अपनी 2जी, जीएसएम और डीटीएच सेवाओं को बंद करने की घोषणा की है।

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