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छत्तीसगढ़ : नक्सलियों से लोहा लेने वाली पहली महिला कमांडेंट निहारिका सिन्हा

कांकेर, 20 अगस्त : सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में कमांडेंट निहारिका छत्तीसगढ़ की पहली महिला अफसर हैं, जो रावघाट रेललाइन मार्ग की सुरक्षा के लिए अंतागढ़ व रावघाट में तैनात हैं, जहां हर पल नक्सली हमले का खतरा बना रहता है। सैकड़ों पुरुष जवानों के बीच वे अकेली महिला अफसर हैं, जो उनका नेतृत्व भी कर रही हैं। 

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नक्सलियों से लोहा लेने वाली पहली महिला कमांडेंट निहारिका..

पिता महेश सिन्हा व मां शोभा सिन्हा की लाडली निहारिका का जन्म गरियाबंद में हुआ, लेकिन पढ़ाई दुर्ग व भिलाई में हुई। दुर्ग के सेंट जेवियर स्कूल में 12वीं तक की पढ़ाई के बाद सीएसआईटी में इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांच में इंजीनियरिंग की। सीपीओ की सब इंस्पेक्टर परीक्षा में निहारिका देश में टॉप पर रहीं। बैंकिंग से लेकर पुलिस सेवाओं के लिए वे कई बार चयनित हो चुकीं, लेकिन उनका लक्ष्य कुछ और ही था। देश के लिए कुछ कर गुजरने के जज्बे के चलते उन्होंने सशस्त्र सीमा बल को चुना। 

2014 में यूपीएससी परीक्षा के जरिए निहारिका का चयन हुआ। इसके पहले एसएसबी में महिला अफसर नहीं हुआ करती थीं। पहले बैच में देश से चार महिलाओं का चयन हुआ, जिनमें एक निहारिका थीं। उनके अलावा पंजाब की नैसी सिंघला, राजस्थान की तनवी शुक्ला और दिल्ली रीना चयनित हुई थीं। निहारिका अपने बारे में बात करने से बचती रहीं। उन्होंने कहा कि मीडिया से बात करने के लिए उन्हें ऊपर (उच्चाधिकारियों) से इजाजत लेनी पड़ती है। 

पिता महेश सिन्हा व माता शोभा सिन्हा को निहारिका पर बहुत गर्व है। वे कहते हैं कि बेटी ने जब फोर्स को चुना, तो पहलेपहल वे खुद को तैयार नहीं कर पाए लेकिन उसका जज्बा व देश के प्रति कुछ कर गुजरने का उसकी इच्छा शक्ति देखी तो इजाजत दे दी। आज बेटी के नाम से ही उनकी पहचान बन गई है। 

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