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तमिलनाडु में कायम है रजनीकांत की लोकप्रियता

चेन्नई (ईएमएस)। अभिनेता से नेता बने सुपरस्टार रजनीकांत ने तमिलनाडु के तूतीकोरिन में वेदांता स्टरलाइट कॉपर प्लांट के विरोध में हो रहे प्रदर्शन के हिंसक होने के पीछे असामाजिक तत्वों का हाथ बताया। इसके बाद से जहां एक ओर लोग इसे उनकी राजनीतिक परिपक्वता में कमी का उदाहरण बता रहे हैं, वहीं कुछ लोगों का मानना है कि राजनीति में बिना एक्टिंग किए अपने मन की बात कहने के लिए रजनी की तारीफ की जानी चाहिए। दरअसल, तमिलनाडु में प्रशासन और पुलिस के खिलाफ हिंसा करने वालों का पक्ष लेने को ही बेहतर माना जाता है। लेकिन रजनी ने उससे उलट वह कहा, जो उन्हें सही लगा। माना जा रहा है कि राज्य में एक धड़ा ऐसा है, जो एआईएडीएमके और डीएमके में से किसी पार्टी का समर्थक नहीं है।

इसी धड़े को लुभाने की कोशिश में रजनी जुटे हैं। जब रजनी तूतीकोरिन के सरकारी अस्पताल में घायलों से मिलने पहुंचे तो लोगों की भीड़ सड़कों पर उनकी एक झलक के लिए कतारों में खड़ी हो गई। यहां तक कि पीड़ित भी कुछ देर के लिए अपना दुख भूल गए। उनसे पहले कई नेता अस्पताल पहुंचे थे। लेकिन उन सब और रजनी से लोगों के बर्ताव के बीच अंतर देखने को मिला। गौरतलब है कि रजनी एमजी रामचंद्रन जैसा प्रशासन देने की बात कहते हैं।

लेकिन तूतीकोरिन में जिस तरह उन्होंने असामाजिक तत्वों पर कड़ाई से नकेल कसने की बात कही, लोगों को उनमें जयललिता की छवि दिखी। रजनी ने राजनीतिक समझदारी का परिचय तब दिया, जब उन्होंने हिंसा की निंदा करने के साथ ही पुलिस फायरिंग का विरोध कर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने फायरिंग को निर्मम बताया। उन्होंने पूरी घटना के लिए राज्य के इंटेलिजेंस विभाग को जिम्मेदार ठहराया।

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