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महाराष्ट्र में बीफ बैन के सभी मामलों की अंतिम सुनवाई फरवरी के तीसरे सप्ताह में : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली,08 जनवरी (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र में बीफ बैन के सभी मामलों की अंतिम सुनवाई फरवरी के तीसरे सप्ताह में करेगा। पिछले 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि महाराष्ट्र में बीफ बैन के सभी मामलों की सुनवाई एक ही बेंच के समक्ष हो। जस्टिस एके सिकरी की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि जस्टिस आरके अग्रवाल की बेंच के समक्ष भी केस लंबित है। इसके बाद कोर्ट ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के पास सभी मामलों के बारे में फैसला करने के लिए भेज दिया था।

जस्टिस एके सिकरी की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष गौरक्षक सेवा संघ की याचिका लंबित थी जबकि जस्टिस आर के अग्रवाल की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष जिस मामले पर सुनवाई हो रही है उसमें हरीश एम जगतानी ने याचिका दायर की है। जस्टिस आरके अग्रवाल और जस्टिस अभय मनोहर सप्रे की बेंच ने भी जगतानी के मामले को दूसरे ऐसे ही मामलों के साथ विस्तृत सुनवाई के लिए टैग करने का निर्देश दिया था।

बांबे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के बाहर से लाकर बीफ का प्रयोग करने की छूट दे दी थी जिसके खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

बांबे हाईकोर्ट ने पिछले साल 6 मई को महाराष्ट्र सरकार के बीफ बैन के फैसले को निरस्त कर दिया था। महाराष्ट्र सरकार ने बीफ पर बैन लगाते हुए इसे रखने वालों के खिलाफ सजा का प्रावधान किया था जिसके खिलाफ बांबे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।

महाराष्ट्र सरकार के कानून के मुताबिक पुलिस को बीफ रखने के शक के चलते किसी भी व्यक्ति को रोकने और तलाशी लेने का अधिकार दिया गया था। इसके साथ ही पुलिस को इस मामले में किसी के घर में घुसकर तलाशी करने का अधिकार भी दिया गया था। महाराष्ट्र सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में गलती की है और इस सेक्शन को रद्द करने पीछे ये तर्क दिया है कि ये लोगों की निजता के मौलिक अधिकार का हनन करता है क्योंकि इसके तहत शक के आधार पर ही पुलिस किसी को रोक सकती है,घर में घुसकर तलाशी ले सकती है।

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