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भारतीय मुसलमानों ने जिन्ना को 1947 में ही नकारा, विवाद राजनीतिक

वल्र्ड फोरम के वल्र्ड प्रेसिडेंट सय्यद मोहम्मद अशरफ अशरफी ने पत्रकारों को दिया जवाब

खरगोन (ईएमएस)। वल्र्ड सुफी फोरम के प्रेसिडेंट सस्यद मोहम्मद अशरफ अशरफी अल जिलानी शेखुल हिंद कछोछा शरीफ ने शनिवार को मीडिया से चर्चा की। उन्होंने चिटनीस कॉलोनी में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान बेबाकी से सामाजिक, राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखी। अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर पर मचे बवाल के जवाब में उन्होंने सटीक जवाब देते हुए कहा भारत के मुसलमानों ने 1947 में ही जिन्ना को नकार दिया था। जिन्ना को स्वीकार करते तो देश में 15 करोड़ मुसलमान नहीं होते। यह राजनीतिक हंगामा हैं। उन्होंने कहा जिन्ना पर राजनीति बंद होना चाहिए। देश को विकास पर ले जाना चाहिए न कि इतिहास की बातों को कुरेदना चाहिए। केंद्र सरकार को शैक्षणिक संस्थाओं को राजनीति से बचाना होगा।

इंसानियत ही नहीं बचेगी तो मंदिर.मस्जिद का क्या करोगे

देश में हिंदुओं की ज्यादा जनसंख्या पर राम मंदिर बनाने पर अशरफी ने कहा हम शांति चाहते हैं। सबकों मिल बैठ इसका निराकरण करना चाहिए। सबसे बड़ी बात इंसानियत की होना चाहिए। इंसानियत के लिए ही लोग मंदिर और मस्जिद करते हैं। जब इंसानियत ही नहीं होगी तो मंदिर और मस्जिद का क्या करोगे। अशरफी ने कहा केवल पुस्तकों का ज्ञान प्राप्त करने से ही कोई व्यक्ति महान नहीं बनता है। उसके अंदर संस्कार व संस्कृति भी होना चाहिए। सोशल मीडिया नकारात्मकता फैलाती है। इससे हिंदू.मुस्लिम में दरार पैदा हो रही है। सभी धर्म के लोगों को भाईचारे से रहना चाहिए। उन्होंने राजनीति (सियासत) पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अब सियासत नफरत फैला चुकी है। इसे हम सबको रोकना जरूरी है।

हर घर से निकालो शांति का संदेश फैलाओ

हम मुसलमान हिंदुस्तानी, भारतीय और इंडियन है। गंगा.जमुना तहजीब को आगे बढ़ाना चाहिए। हर घर से निकलो और शांति का संदेश फैलाओ। देश में मुसलमान को पिछडऩे का कारण अशिक्षा है। यहां 50 प्रतिशत बच्चे स्कूल ही नहीं पहुंचे हैं। सबसे पहले शिक्षित करना जरूरी है। उन्होंने समाज में शिक्षा का स्तर, आतंकवाद, हिंदू-मुस्लिम में बढ़ती दुरियों व तीन तलाक जैसे ज्वलंत मुद़्दों पर अपनी बात रखी। वर्तमान सरकार की रीति-नीतियों पर उन्होंने कहा- अब तक जो भी सरकार रही हो यदि वे अच्छी होती तो धर्म विशेष की 50 फीसदी आबादी अशिक्षित न होती। यह प्रेसवार्ता ऑल इंडिया उलेमा एंड मशाइख बोर्ड के तत्वावधान में हुई।

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