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विधानसभा चुनाव : महायुति में बागवत के सुर, पंकजा मुंडे के सामने बड़ी चुनौती

मुंबई । भाजपा-शिवसेना के उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद बीड़ जिले में महिला एवं बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। टिकट कटने से नाराज पार्टी नेताओं के बगावत के सुर सुनाई देने लगे हैं। जिले की परली विधानसभा सीट से लगातार दो बार जीतने वाली पंकजा को इस बार भी उम्मीदवार बनाया गया है। विधानसभा चुनाव के लिए माजलगांव विधानसभा सीट से भाजपा ने रमेश आडसकर को उम्मीदवार बनाया है। इससे नाराज मोहन जगताप ने किसी अन्य पार्टी से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इधर भाजपा विधायक लक्ष्मण पवार की गेवराई से उम्मीदवारी घोषित होने के बाद शिवसेना के पूर्व मंत्री बदामराव पंडित ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की है।

महायुति (महागठबंधन) में आंतरिक विद्रोह तब सामने आया है जब बीड़ जिले के निर्वाचन क्षेत्रों के उम्मीदवार घोषित किए गए हैं। चुनाव लड़ने की इच्छा रखनेवाले नेताओं ने किसी भी चुनाव चिह्न अथवा पार्टी से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। समर्थकों के साथ बैठकों का दौर जारी है। भाजपा विधायक भीमराव धोंडे को आष्टी सीट से फिर उम्मीदवारी मिलने के बाद नाराज पूर्व विधायक सुरेश धस के समर्थकों ने एक बैठक बुलाई और अब युद्ध अटल है का संकेत दिया है। सुरेश धस एनसीपी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। केज सीट से टिकट कटा तो भाजपा विधायक संगीता ठोंबरे ने अपनी अगली रणनीति के बारे में जल्द खुलासा करने की बात कही है।

एनसीपी छोड़कर भाजपा में शामिल हुई नमिता मुंदड़ा को उम्मीदवारी मिलने की चर्चा है। केज सीट से शरद पवार ने नमिता को उम्मीदवार घोषित कर दिया था, बावजूद इसके नमिता एनसीपी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गईं। इसी तरह बीड़ निर्वाचन क्षेत्र से शिवसेना ने जयदत्त क्षीरसागर को उम्मीदवार बनाया है। इसे लेकर सहयोगी दल शिवसंग्राम के अध्यक्ष विनायक मेटे ने नाराजगी जतायी है। भाजपा की मेधा कुलकर्णी भी नाराज हैं। उनका कहना है कि जिसे देवता माना उसी मुख्यमंत्री ने घात किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील दावा कर चुके हैं कि भाजपा एवं शिवसेना बड़ी और अनुशासित पार्टियां हैं। नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को शांत करना संगठन की एक नीति है। संगठन में विद्रोह की कहीं गुंजाइश नहीं है।

उल्लेखनीय है कि बीड़ लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत छह विधानसभा सीटें- बीड़, गेवराई, माजलगांव, आष्टी, केज और परली आती हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा पांच सीटें जीती थीं, जबकि राकांपा सिर्फ बीड़ सीट पर कब्जा जमा सकी थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे बीड़ लोकसभा सीट से वर्ष 2009 और 2014 में जीते थे। वर्ष 2014 में मोदी सरकार में कैब‍िनेट मंत्री की शपथ लिए हुए 10 दिन ही हुए थे कि नई दिल्ली में हुए एक हादसे में गोपीनाथ मुंडे की मौत हो गई थी। इसके बाद इस सीट पर हुए उपचुनाव में उनकी मंझली बेटी डॉ. प्रीतम मुंडे भारी बहुमत से जीतकर सांसद बनीं। प्रीतम मुंडे हाल में हुए लोकसभा चुनाव (2019) में लगातार दूसरी बार जीती हैं।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के गठबंधन को युति (गठबंधन) कहते हैं। भाजपा-शिवसेना के अलावा चार अन्य दलों के युति में शामिल होने के बाद इसे महायुति (महागठबंधन) कहते हैं।

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