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GST के बाद पुराने गहने बेचने में छूटेंगे पसीने .

नई दिल्ली,10 जून:  GST(गुड्स एंड सर्विस टैक्स) लागू होने के बाद ज्वैलर्स को पुराने गहने बेचना आसान नहीं होगा। GST आने पर सब कुछ ऑन पेपर हो जाएगा। ज्वैलर्स को अब पुरानी  ज्वैलरी खरीदने पर रिवर्स चार्ज देना होगा। साथ ही उसे अपने रिकॉर्ड बुक में पुरानी खरीदी ज्वैलरी की डिटेल देनी होगी। अभी तक ज्यादातर ज्वैलर्स पुरानी खरीद को बुक में नहीं दिखाते थे।

लेकिन GST आने के बाद उन्हें सब कुछ अपनी बुक में दिखाना होगा। अभी असंगठित ज्वैलर पुरानी ज्वैलरी की खरीद को अपने इन्वॉइस में नहीं दिखाते। नए सिस्टम में अब ये भी ऑन-रिकॉर्ड होगा। मौजूदा सिस्टम में ज्यादातर कारोबारी पुरानी ज्वैलरी को खरीद कर और उसमें वैल्यू एडिशन कर बेचते हैं। ऐसे में उन्हें केवल डिफरेंस प्राइस पर ही टैक्स देना होता है।

पुराना स्टॉक खरीदने पर देना होगा रिवर्स चार्ज 

पुराने गहने को बेचने की ऐसी ट्रेड प्रेक्टिस को ऑन रिकॉर्ड लाने के लिए सरकार काम कर रही है, ताकि, उसे ज्यादा से ज्यादा टैक्स मिल सके। सरकार ज्वैलरी खरीदने और बेचने वाले का रिकॉर्ड रखना चाहती है, इसलिए सरकार ने GST में रूल्स तय किए हैं। अब ज्वैलर को पुराना स्टॉक खरीदने पर रिवर्स चार्ज देना होगा। पुरानी ज्वैलरी पर वैल्यू एडीशन कर या पुराने गहने खरीदकर, नई ज्वैलरी बेचने पर जीएसटी भी देना होगा।

ज्वैलर को देना होगा डबल टैक्स

उदाहरण के तौर पर अगर ग्राहक एक लाख रुपए का पुराना गहना बेचकर 1.50 लाख रुपए का नया गहना खरीदता था, तो वह ग्राहक और ज्वैलर डिफरेंस यानी 50,000 पर टैक्स देता था, लेकिन GST लागू होने के बाद अब ऐसा नहीं होगा। अब ज्वैलर को 1,00,000 रुपए पर रिवर्स चार्ज सरकार को देगा। 1.50 लाख रुपए के गहने पर GST ग्राहक से लेगा। यानी, ज्वैलर को सरकार को दो बार टैक्स जमा कराना होगा। 

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