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‘जदयू-बीजेपी से अलग नहीं था हमारा बंद, सरकारी पार्टी इसे गुंडागर्दी बताती रही’

 पटना, सनाउल हक़ चंचल

पटना : गुरुवार को राजद बिहार बंद काफी असरदार रहा. कई जगह हिंसा की भी खबर आई तो कई जगह जाम लग जाने के कारण एम्बुलेंस पास होने में काफी दिक्कत आई. खबर यह भी आई कि इस बिहार बंद में 2 लोगों की जान भी चली गई. जिस पर कई तरह की राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई.  सरकारी पक्ष ने भी यही आरोप लगाया कि राजद बंद की वजह से ही 2 लोगों की जान चली गई. अब इस पर पूर्व सांसद और अभी राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. साथ ही उन्होंने नीतीश सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी घेरा है.

सरकारी पक्ष का आरोप है कि कल के राजद के बंद की वजह से वैशाली और कटिहार मिलाकर दो लोगों की मौत हो गई. इन मौत की जवाबदेही राजद की है. टेलिग्राफ़ अख़बार में अमित भेलारी की इस मुत्तलिक रिपोर्ट छपी है. दोनों जिलों के पुलिस अधीक्षकों ने ऐसे किसी ख़बर से इंकार किया है. सम्बंधित जिलों के पदाधिकारियों से बग़ैर बात किए सरकारी पार्टी के झूठे आरोप को सही बताते हए उसे छाप देने या गला फाड़कर गुंडागर्दी बताने को क्या कहिएगा !

ऐसा नहीं है कीं बंद में जीवन सामान्य था. लोगों को निश्चित परेशानी हुई होगी. मैंने नीतीश और सुशील मोदी, दोनों की पार्टियों का बंद देखा है. उनसे कुछ अलग तरह का तो नहीं था कल का हमारा बंद ! लोग किसी अन्याय या सरकार की किसी ग़लत नीति का विरोध करने सड़क पर उतरेंगे तो लोगों को परेशानी नहीं होगी यह दावा कौन कर सकता है ! लोग को संघर्ष का ताप लगेगा क्या इसी तर्क से अन्याय का प्रतिकार नहीं किया जाए ! तब लोकतंत्र का पीडंदान कर देना ही विकल्प बचता है. इस विकल्प के लिए हम तैयार नहीं हैं. 

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पिछले छः महीने से लाखों लोग का काम-धंधा बंद है. कृषि के बाद बिहार में बालू खनन और निर्माण का क्षेत्र ही सबसे ज़्यादा रोज़गार देने वाला क्षेत्र है. इस क्षेत्र पर माफियाओं  का क़ब्ज़ा है. यह आरोप लगाकर सरकारी उत्पात के द्वारा यह काम पिछले छ: महीने से बंद करा दिया गया है. इसका सबसे कठोर प्रभाव शरीर से मेहनत के द्वारा इस क्षेत्र से उपार्जित कर परिवार पालने वालों श्रमिकों पर पड़ा है. इसके बाद राज मिस्त्री, ट्रैक्टर-ट्रक चलाने वाले ड्राइवर-खलासी आदि पर पड़ा है. ट्रक, ट्रैक्टर या इस काम मे लगने वाली मशीन ख़रीद कर इस काम में लगे लोगों ने बैंक से क़र्ज़ लिया हुआ है. किस्त नहीं चुका पा रहे हैं. लाखों लोग त्रस्त हैं. यह तो एक तरह का गंभीर सरकारी अपराध है.

नीतीश के पादुका-पूजकों का दावा है कि उनको भ्रष्टाचार शब्द से ही नफ़रत है. लेकिन यह समझ के बाहर है कि इतने नफ़रत के बावजूद नीतीश सरकार में घोटालों का रेकाड कैसे बनता जा रहा है ! घोटालेबाजों पर त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं होती है !सृजन घोटाले में शामिल जयश्री ठाकुर के यहाँ 2013 की निगरानी की छापेमारी में नगदी सहित लग-भग बीस करोड़ रु. की अवैध संपति का  पता चला. उनको सेवा से बर्खास्त करने में ईमानदार सरकार ने चार साल लगाए. अन्य घोटालों में जो नामज़द अभियुक्त अफ़सर हैं चैन से अपनी कुर्सी पर बैठे हुए हैं. आप कह सकते हैं कीं नीतीश को भ्रष्टाचार शब्द से नफ़रत है. लेकिन भ्रष्टाचारियों से बेपनाह मुहब्बत है ! इनके अग़ल-बग़ल के लोगों को देख कर आप स्वंय तस्दीक़ कर लीजिए.

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