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मंत्रालय के सामने आत्महत्या की कोशिश करने वाले 80 वर्षीय वृद्ध किसान की मौत , परिवार ने शव लेने से किया इंकार

मुंबई, 29 जनवरी (हि.स.)। मंत्रालय में विषप्राशन करने वाले किसान धर्मा पाटील की बीती रात जे.जे. अस्पताल में मौत के बाद उनके परिजनों ने उनका शव लेने से इंकार कर दिया है। धर्मा पाटील के बेटे नरेंद्र पाटील ने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री इस मामले में कार्रवाई का लिखित आश्वासन नहीं देते हैं, तब तक वह अपने पिता का शव नहीं लेंगे। उधर उर्जामंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा है कि इस मामले में सरकार पूरी तरह संवेदनशील है और धर्मा पाटील के परिजनों को हर तरह की मदद करने के लिए तैयार है। 

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मिली जानकारी के अनुसार धर्मा पाटील की 5 एकड़ जमीन का संपादन सरकार की ओर से किया गया था और उन्हें उनकी जमीन का सिर्फ 5 लाख रुपया मुआवजा दिया गया था। जबकि उनके अगल- बगल की जमीन का मुआवजा सरकार की ओर से करोड़ों रुपए दिया गया था। इसी अन्याय की आवाज धर्मा पाटील हर मंच पर उठा रहे थे। लेकिन कहीं आवाज न सुने जाने पर धर्मा पाटील 22 जनवरी को मंत्रालय में मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाना चाहते थे। मुख्यमंत्री कार्यालय में अपेक्षित उत्तर न मिलने से नाराज धर्मा पाटील ने वहीं पर जहर खा लिया था। इसके बाद धर्मा पाटील को तत्काल सेंट जार्ज अस्पताल में भरती करवाया गया था।

बाद में उनकी तबियत बिगडऩे के बाद धर्मा पाटील को इलाज के लिए जे.जे. अस्पताल में शिफ्ट किया गया था, जहां बीती रात उनका निधन हो गया। मिली जानकारी के अनुसार नरेंद्र पाटील ने अपने पिता की आंख व अन्य अंगों को दान देने संबंधी फार्म पहले ही भर दिया था। लेकिन पिता की मौत के बाद पूरा परिवार सदमे में है और मुख्यमंत्री के लिखित आश्वासन मिलने तक शव लेने से इंकार कर दिया है। 

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