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रामजन्मभूमि मन्दिर की सूचना सार्वजनिक नहीं करेगी योगी सरकार

लखनऊ, 05 दिसम्बर (हि.स.)। अयोध्या में राम जन्मभूमि मामले में जहां सुनवाई टल गई है और अब 8 फरवरी 2018 को सुप्रीम कोर्ट इस पर अगली सुनवाई करेगा। वहीं उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस मुद्दे से सम्बन्धित सूचना को आरटीआई के तहत देने से इनकार किया है। 

राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद मुद्दे से सम्बंधित सूचना को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत देने में असमर्थता जतायी गई है। राजधानी के आरटीआई एक्टिविस्ट संजय शर्मा ने बीते 16 सितम्बर को यूपी के मुख्य सचिव कार्यालय में एक आरटीआई दायर करके बाबरी ढांचा ध्वस्त होने से अब तक राम लला रामजन्मभूमि मन्दिर की सुरक्षा और देखरेख पर हुए खर्चे, मंदिर के तिरपाल पर आये खर्च, तिरपाल बदलने पर आये खर्चे, रामजन्मभूमि-बाबरी विवाद की अदालती कार्यवाहियों पर आये सरकारी खर्चों, बाबरी ढांचा टूटने के उत्तरदाई लोकसेवकों को दिए दंड और राम लला रामजन्मभूमि मन्दिर का पुजारी नियुक्त करने की विहित प्रक्रिया की सूचना मांगी थी। 

मुख्य सचिव कार्यालय के अनु सचिव और जन सूचना अधिकारी ने संजय शर्मा की आरटीआई अर्जी बीते 21 सितम्बर को ही उत्तर प्रदेश के गृह विभाग को अंतरित कर दी थी। अब गृह विभाग के साम्प्रदायिकता नियंत्रण प्रकोष्ठ के विशेष कार्याधिकारी अशोक कुमार सिंह ने संजय को यह कहते हुए सूचना देने से मना किया है कि उ.प्र. सरकार की वर्ष 2006 की एक अधिसूचना के मुताबिक सुरक्षा बलों से सम्बन्धित सूचना को सूचना के अधिकार अधिनियम की परिधि से मुक्त रखा गया है। इसके साथ ही संजय से कहा गया है कि अगर वह इस जवाब से सन्तुष्ट नहीं हैं तो सम्बन्धित अधिनियम की धारा 19 (1) के तहत जवाबी पत्र प्राप्त होने की तारीख से तीस दिन के अन्दर प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील दायर कर सकते हैं। 

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