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साइबर हमले के पीछे था खतरनाक मंसूबा, पेट्रोकेमिकल प्लांट को उड़ाना चाहते थे हैकर्स

रियाद (ईएमएस)। बीते साल एक पेट्रोकेमिकल कंपनी के सऊदी अरब स्थित प्लांट को एक नए तरह के साइबर हमले का सामना करना पड़ा था। इस हमले का उद्देश्य केवल डेटा नष्ट करना या प्लांट बंद करना नहीं था, इसका उद्देश्य प्लांट के कामकाज को पूरी तरह ठप करने के साथ-साथ भीषण विस्फोट करते हुए प्लांट को नष्ट करना था। वह नाकाम हमला अंतरराष्ट्रीय हैकिंग के खतरनाक रूप को दिखाता है कि किस तरह गुमनाम दुश्मन साइबर अटैक के साथ-साथ विस्फोट जैसे गंभीर फीजिकल डैमेज पहुंचाने की क्षमता हासिल कर चुके हैं। अमेरिकी सरकार के अधिकारियों, उनके सहयोगियों और साइबर सिक्यॉरिटी शोधकर्ताओं को इस बात की चिंता सता रही है कि दूसरे देशों में भी इसी तरह के साइबर हमले की कोशिश हो सकती है। दुनियाभर में हजारों इंडस्ट्रियल प्लांट उसी अमेरिकी कंप्यूटर सिस्टम पर काम कर रहे हैं, जिस पर सऊदी अरब का वह प्लांट काम कर रहा था, जिसे हैकर्स ने निशाना बनाया था।

अगस्त में हुए हमले को लेकर जांचकर्ता चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने अभी तक न उस कंपनी के नाम का खुलासा किया है और न ही यह बताया है कि उस कंपनी का किस देश से संबंध है। जांचकर्ताओं ने अब तक साइबर हमलावरों की भी पहचान नहीं की है। हालांकि साइबर सिक्यॉरिटी विशेषज्ञों समेत तमाम लोगों के मुताबिक जिस तरह हमले को अंजाम दिया गया, उससे संकेत मिलता है कि हमलावरों को किसी सरकार की मदद हासिल हो। सभी जांचकर्ताओं का मानना है कि हमले का उद्देश्य संभवतः विस्फोट करना था, जिससे लोगों की मौत हो। हमलावरों के कंप्यूटर कोड में एक गलती रह जाने की वजह से विस्फोट नहीं हुआ। सऊदी अरब में पेट्रोकेमिकल प्लांट्स पर होने वाले साइबर हमलों में यह सबसे खतरनाक था। जनवरी 2017 में तासनी स्थित नेशनल इंडस्ट्रियलाइजेशन कंपनी के कंप्यूटर ठप हो गए। वह सऊदी के कुछ चुनिंदा निजी पेट्रोकेमिकल कंपनियों में से एक थी। इतना ही नहीं, तासनी से 25 किलोमीटर दूर स्थित सदारा केमिकल कंपनी के भी कंप्यूटर क्रैश हो गए थे। सदारा केमिकल साऊदी की दिग्गज कंपनी सऊदी अरैमको और डाउ केमिकल की जॉइंट वेंचर है।

तासनी में साइबर अटैक के कुछ ही मिनटों के भीतर कंपनी के कंप्यूटरों के सारे डेटा नष्ट हो गए और उन पर ऐलन कुर्दी की तस्वीर दिखने लगी। कुर्दी सीरिया का वह छोटा बच्चा था जिसका शव तुर्की के पास समुद्र तट पर मिला था। उसकी तस्वीर सीरियाई शरणार्थी समस्या का पर्याय बन गई थी और दुनियाभर में चर्चित हुई थी। ऐलन कुर्दी का परिवार सीरिया में चल रहे गृहयुद्ध से बचने के लिए पलायन कर रहा था, उसी दौरान समुद्र में डूबने से उस मासूम को मौत हो गई थी। तासनी के अधिकारियों और साइबर सिक्यॉरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि जनवरी में हुए हमले का मकसद पेट्रोकेमिकल कंपनियों को जबरदस्त नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी देना था। उस साइबर हमले से उबरने में महीनों का समय लगा था। जांचकर्ताओं के अनुसार इन हमलों के लिए कोई देश जिम्मेदार रहा है। सिक्यॉरिटी एक्सपर्ट्स ने कहा ईरान, चीन, रूस, इजरायल और अमेरिका के पास ही इस खतरनाक स्तर के हमले की सामर्थ्य है।

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