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योगी सरकार के दलहन-तिलहन केन्द्र से किसानों की आमदनी होगी दोगुनी

हमीरपुर। भाजपा सरकार में पहली मर्तबा संचालित किये गये दलहन तिलहन क्रय केन्द्रों से किसानों की स्थिति संवरेगी। हालांकि जनपद के दो बड़े स्थानों में समर्थन मूल्य के साथ शुरू किये गये इन केन्द्रों में चने की ही खरीद हो रही है। अभी तक 238 किसानों को चने बेचने पर 117.00 लाख रुपये का भुगतान मिल चुका है। जिससे किसानों के चेहरे में मुस्कान देखी जा रही है। इन क्रय केन्द्रों में अभी सरसों और मसूर की खरीद फिलहाल नहीं हो पा रही है।

बुन्देलखंड के हमीरपुर जिले में पिछले डेढ़ दशक से दैवीय आपदा से लाखों किसानों की हालत बदतर हो गयी है। पूर्व की सरकारों ने किसानों के लिये ऐसी कोई योजनायें भी जमीन पर नहीं उतारी कि जिससे उनकी बदहाली दूर हो सके। जब से केन्द्र और राज्य में भाजपा की सरकारें सत्तारूढ़ हुई तब से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण योजनाओं की सौगात किसानों को मिलने लगी।

योगी आदित्यनाथ की सरकार में किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिये दलहन तिलहन क्रय केन्द्र शुरू कराये गये है। जनपद के राठ व मौदहा में एक-एक क्रय केन्द्र संचालित हो रहे हैं। इन क्रय केन्द्रों में सिर्फ चने की ही खरीद हो रही है। जबकि सरसों और मसूर की खरीद अभी तक नहीं हो पायी है। इसके बाद भी किसानों में समर्थन मूल्य योजना को लेकर खुशी देखी जा रही है। बता दें कि यहां जनपद में 2.12 लाख किसान खेतीबाड़ी करते है। जनपद में 1.50 लाख लघु सीमान्त किसान है।

वहीं सवा लाख किसान बैंकों से केसीसी बनवाकर लोन ले रखा है। इधर मुस्करा क्षेत्र के खड़ेहीलोधन गांव निवासी चन्द्रपाल ने बताया कि सरकार की दलहन तिलहन में समर्थन मूल्य योजना से किसानों की स्थिति संवरेगी लेकिन इन केन्द्रों में मसूर और सरसों की भी खरीद होनी चाहिये। कुरारा निवासी किसान ओम प्रकाश ने बताया कि भाजपा सरकार में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिये लगातार काम हो रहे है जिससे किसान आने वाले समय में आर्थिक रूप से मजबूत होगा।

दलहन तिलहन में समर्थन मूल्य से लाभान्वित होंगे किसान

जिला खाद्य विपणन अधिकारी बृजेश कुमार यादव ने रविवार को बताया कि सरकार ने दलहन तिलहन की खरीद के लिये समर्थन मूल्य घोषित किया है जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि चने का इस बार समर्थन मूल्य 4825 रुपये है वहीं मसूर का 4800 रुपये तथा सरसों का समर्थन मूल्य 4425 रुपये निर्धारित है। उन्होंने बताया कि वारदाना (बोरा) की कमी के कारण यहां सरसों और मसूर की खरीद नहीं हो पा रही है। जिलाधिकारी ने शासन को इस समस्या को लेकर पत्र लिखा है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने बताया कि राठ मंडी में पीसीएफ एक और दलहन तिलहन क्रय केन्द्र संचालित करेगा। जैसे ही वारदाना उपलब्ध हो जायेगा तो यहां भी खरीद प्रारम्भ होगी। वारदाना को लेकर पीसीएफ के एमडी को पत्र भेजा गया है।

414.30 एमटी चने की हो सकी खरीद

जिले के राठ और मौदहा में संचालित दलहन, तिलहन क्रय केन्द्रों में अभी तक 414.30 एमटी चने की ही खरीद हो सकी। ये दोनों क्रय केन्द्र पीसीयू संचालित कर रहा है। राठ में संचालित क्रय केन्द्र में अभी तक 102 किसानों से 187.60 एमटी चने की खरीद हो सकी। पीसीयू एजेंसी ने इन किसानों को 42.00 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया है। मौदहा के क्रय केन्द्र में भी 136 किसानों से 226.70 एमटी चने की खरीद की गयी है। एजेंसी ने इन किसानों को 75.00 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया है। अभी तक जनपद में दोनों क्रय केन्द्रों में चने की खरीद कर 238 किसानों को 117.00 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है वहीं 84.971 लाख रुपये का भुगतान अभी किसानों को बाद में मिलेगा। मसूर और सरसों की खरीद फिलहाल बंद है।

खरीफ में अधिक क्षेत्रफल में होती है दलहन की फसल

जिला कृषि अधिकारी सरस कुमार तिवारी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि जनपद में खरीफ की फसलों में 15688 हेक्टेयर क्षेत्र में उरद की फसल कर किसानों को 2636 एमटी तक उपज मिल रही है वहीं 5547 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंग की फसल की बोआई कर किसान 926 एमटी उत्पादन करते है। इसके अलावा 7087 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अरहर की फसल की बोआई कर किसान 8711 एमटी तक उत्पादन करते है। रबी के मौसम में 7304 हेक्टेयर क्षेत्र में चने की फसल होती है जिससे किसानों को 8388 एमटी तक उपज मिलता है। मटर की फसल 8796 हेक्टेयर क्षेत्रफल में कर किसान 1318 एमटी तक उपज लेते है। वहीं 20840 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मसूर की फसल की बोआई कर किसान 20226 एमटी तक उपज प्राप्त करते है।

उन्नति शील बीज बोने से किसानों को मिलेगा अच्छा लाभ

जिला कृषि अधिकारी सरस कुमार तिवारी ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि बीज शोधन करने के साथ ही उन्नति शील बीज बोने से किसानों को फसल की अच्छी उपज मिलती है। जनपद में 8.68 कुंतल प्रति हेक्टेयर उरद की उपज किसानों को मिल रही है वहीं 12.29 कुंतल प्रति हेक्टेयर अरहर, 11.49 कुंतल प्रति हेक्टेयर चना, 14.80 कुंतल प्रति हेक्टेयर मटर, , 9.71 कुंतल प्रति हेक्टेयर मसूर तथा 1.67 कुंतल प्रति हेक्टेयर मूंग की उपज मिलती है।

उन्होंने बताया कि किसानों को फसल की अच्छी उपज लेने के लिये पहले बीज का शोधन जरूर कराना चाहिये। इसके अलावा अच्छी और उन्नति शील प्रजाति के बीज होने से भी किसानों की आमदनी दोगुनी होगी। समय-समय पर खरपतवार को नियंत्रण करने के लिये रसायन का छिड़काव करना चाहिये। (एजेंसी, हि.स.)

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