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आखिरकार जमीयत के ईद मिलन में शामिल नहीं हुए राहुल

नई दिल्ली, 21 जून (हि.स.)। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी आखिरकार जमीयत उलेमा ए हिन्द के ईद मिलन समारोह में शामिल नहीं ही हुए। हिन्दुस्थान समाचार ने सबसे पहले यह खबर दी थी राहुल गांधी ईद मिलन से दूरी रख सकते हैं। दरअसल कांग्रेस का ही एक मजबूत खेमा यह नहीं चाहता है कि एक बार फिर कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टीकरण नीति पर चलने का आरोप लगे। पिछले लोकसभा चुनावों में करारी पराजय के बाद कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्षा सोनिया गांधी ने स्वीकार किया था कि हमारे विरोधी इस बात का प्रचार करने में सफल रहे कि कांग्रेस मुस्लिमपरस्त व हिन्दू विरोधी है।

यही कारण है कि पिछले काफी समय में कांग्रेस के तौर तरीकों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में बदलाव आया है। गुजरात विधानसभा चुनाव से राहुल गांधी जनेऊधारी पंडित के रूप में उभरे थे तो कर्नाटक में भी मंदिर-मंदिर भटकते दिखे। बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने तय किया है कि वह नरम हिन्दुत्व के पैरोकार का चेहरा बनने को तैयार है। इसीलिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के ईद मिलन कार्यक्रम में शामिल न होने का निर्णय किया। 

हिन्दुस्थान समाचार ने मंगलवार को बता दिया था कि इस बार राहुल गांधी ईद मिलन में शामिल नहीं होंगे। प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के ‘ईद मिलन’ समारोह में बुधवार को पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, कांग्रेस के संगठन महासचिव अशोक गहलोत, महासचिव गुलाम नबी आजाद और अहमद पटेल, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और ‘आप’ सांसद संजय सिंह, राजद नेता तेजस्वी यादव, राकांपा के डीपी त्रिपाठी, तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी, रालोद के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी, जद(एस) के महासचिव कुंवर दानिश अली, भाकपा के अतुल कुमार अंजान और लोकतांत्रिक जनता दल के अली अनवर अंसारी शामिल हुए। 

जमीयत अध्यक्ष मौलाना असद मदनी ने कहा कि देश में इस समय अमन और भाईचारे की सख्त जरूरत है। इसके लिए सभी लोगों को मिलकर प्रयास करने होंगे। उल्लेखनीय है कि प्रमुख मुस्लिम संगठन जम्यत उलेमा-ए-हिन्द को कांग्रेस के बेहद क़रीब माना जाता है।

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