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गर्मी से राहत लेकर आई बारिश की बूंदें , लाएंगी महंगाई की भी आफत?

नई दिल्ली (ईएमएस)। पिछले कुछ दिनों से उत्तर भारत के कई इलाकों में मौसम ने अचानक करवट बदल ली है। मार्च में जिस तरह से गर्मी ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू किया था, उससे लग रहा था कि इस बार अप्रैल में ही जून जैसी गर्मी झेलनी पड़ेगी। भला हो वस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) का। इसी पश्चिमी विक्षोभ के चलते कहीं बारिश तो कहीं ओले और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी भी पिछले एक-दो हफ्ते में देखने को मिली है। तेजी से चढ़ रहे पारे को मौसम की इस करवट ने न सिर्फ थाम दिया, बल्कि उसे खींचकर नीचे ले आया है। पश्चिमी विक्षोभ क्या होता है, इस पर हम आगे बात करेंगे। लेकिन फिलहाल बारिश और ओलावृष्टि से कुछ चिंताएं भी बढ़ी हैं और यह चिंता कुछ और नहीं महंगाई को लेकर है। बारिश और ओलावृष्टि को लेकर चिंता इसलिए है, क्योंकि अकसर बेमौसम बारिश महंगाई लेकर आती है। पश्चिमी विक्षोभ के चलते उत्तर भारत के पहाड़ों और मैदानी इलाकों में बारिश रबी की फसल की कटाई के वक्त हो रही है। वैसे ज्यादा चिंता की बात इसलिए नहीं है, क्योंकि बारिश शुरू होने से पहले ही ज्यादातर कटाई हो चुकी है।

कहीं-कहीं से थोड़ा-बहुत नुकसान की खबरें आ रही हैं, लेकिन यह नुकसान बड़े पैमाने पर नहीं है, इसलिए ज्यादा चिंता की बात नहीं है। बारिश ऐसे वक्त पर हुई है, जब कई इलाकों में या तो आम पर बौर आया हुआ है या अभी वह काफी छोटा है। ऐसे में जिन इलाकों में ओले गिरे हैं, वहां आम की फसल को जरूर नुकसान हुआ है। पिछले कुछ दिनों में कई ऐसी तस्वीरें आपकी भी आंखों के सामने से गुजरी होंगी, जिसमें छोटे-छोटे आम जमीन पर गिरे हुए दिख रहे होंगे। जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं कि ओलावृष्टि भी कुछ ही इलाकों में हुई है, इसलिए आम की फसल को भी कुछ गिने-चुने क्षेत्रों में नुकसान होगा। अगर बारिश और ओलावृष्टि आगे भी जारी रहीं तो जरूर आम की मिठास पर इस बार ग्रहण लग सकता है और यह आम आदमी की पहुंच से दूर हो सकता है। लेकिन फिलहाल जितनी ओलावृष्टि हुई है, उसे देखते हुए ऐसा पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता। भारत में मौसमों के बदलाव और बारिश के वितरण में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक अहम भूमिका निभाता है।

आपके मन भी कई बार यह सवाल उठा होगा कि आखिर यह वेस्टर्न डिस्टर्बेंस है क्या चीज। कैसे और क्यों यह भारत में होने वाली बारिश और मौसम में बदलावों पर असर डालता है। दरअसल यह वह हवाएं या अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय तूफान हैं, जो भूमध्य सागर के आसपास से शुरू होती हैं। इनके चलते ही पाकिस्तान और उत्तर भारत के कई इलाकों में सर्दियों में बारिश व बर्फबारी होती है। भूमध्य सागर और अटलांटिक महासागर से नमी लेकर यह हवाएं भारत -पाकिस्तान को सर्दियों में तर करती हैं। अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय तूफान दुनियाभर में आते हैं और ऊपरी वायुमंडल तक नमी को ले जाते हैं। जबकि उष्णकटिबंधीय तूफान निचले वायुमंडल तक ही नमी को ले जाते हैं। जैसे ही अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय तूफानी हवाएं हिमालय से टकराती हैं, तो यह भारतीय उपमहाद्वीप के निचले इलाकों में सर्दियों में बारिश करती हैं और उच्च हिमालय में इनकी वजह से ही बर्फबारी होती है। पश्चिमी विक्षोभ रबी की फसलों के लिए खासे महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान गेहूं आदि कई खाद्यान्न उगाए जाते हैं।

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