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पालघर : जिला अध्यक्ष ने स्वर्गीय पत्नी का 2 डेथ सर्टिफिकेट बनाकर किया लाखो का घोटाला !

मुंबई, 12 अप्रैल = पालघर जिले की वसई-विरार शहर में भाजपा के जिलाध्यक्ष सुभाष साटम ने मृतक पत्नी के नाम से दो-दो मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए। वहीं दूसरी पत्नी के नाम से बनावटी कागजत तैयार करके लाखों रुपये का राजस्व घोटाला किया है।

जिलाध्यक्ष साटम के इस महाघोटाले को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष गोविंदा गुंजालकर ने तुलिंज पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। गुंजालकर ने पुलिस को बताया कि सुभाष साटम ने मृतक पत्नी की जगह अपनी दूसरी पत्नी को खड़ा करके रामभाऊ म्हालगी सहकारी पतपेढ़ी में लाखों रुपये का घोटाला किया है।

गौरतलब है कि केंद्र में जहां प्रधानमंत्री अपनी स्वच्छता मुहिम चला कर देश को भ्रष्टाचार मुक्त करना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी ही पार्टी के शहर जिला अध्यक्ष सुभाष साटम ने पीएम मोदी की मुहिम को ठेंगा दिखाते हुए बड़े पैमाने पर घोटाला है। बताया जाता है कि अचोले स्थिति सर्वे नं. 146 पर अंबिका अपार्टमेंट में गाला नं. 9 साटम की पहली पत्नी सुवर्णा सुभाष साटम के नाम पर था। इस गाले को रामभाऊ म्हालगी पतपेढी को भाड़े पर दिया गया था। रामभाऊ म्हालगी सहकारी पतपेढी के संचालक मंडल में सुभाष साटम संचालक पद पर थे।

वर्ष 2004 में इस गाले को सुभाष साटम ने बेचने का निश्चय किया। गाले की कीमत सुनील अपरे ने 34 लाख 27 हजार निश्चित किया। गाले की तय बिक्री राशि के अनुसार वर्ष 2006 तक भुगतान करने का करार किया गया था। पूर्ण भुगतान होने के बाद वर्ष 2006 में दुय्यम निबंधन-2 वसई के यहां दस्तावेज रजिस्ट्री की गयी। रजिस्ट्री के समय सुभाष साटम ने दूसरी पत्नी को पहली पत्नी सुवर्णा बताकर रजिस्ट्री किया, जबकि सुवर्णा की मृत्यु 28 अप्रैल 2003 में ही हो चुकी थी। वर्ष 2004 में गाले का मूल्यांकन राशि 34 लाख 27 हजार रुपये आंकी गयी थी और गाले की बिक्री की राशि इसी दर से तय हुई थी, लेकिन मुद्रांक शुल्क बचाने के लिए गाले का रजिस्ट्रेशन 3 लाख 65 हजार 640 रुपये में किया गया।

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इसका मुद्रांक शुल्क महज 21 हजार 150 रुपये जमा किया गया। सुभाष साटम द्वारा अपने घोटाले को छिपाने के लिए एक बार फिर से मृतक पत्नी सुवर्णा का दूसरा मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया। भाजपा के जिला शहर अध्यक्ष साटम ने वसई विरार मनपा के रिश्वतखोर अधिकारी से मिलकर 15 अक्टूबर 2011 में जाली प्रमाण पत्र तैयार करवा लिया, जबकि सुवर्णा की प्रथम मृत्यु प्रमाणपत्र 28 अप्रैल 2003 को जारी हुआ है। एक पत्नी का दो-दो मृत्यु प्रमाण बनवाया है। गुंजालकर ने रामभाऊ म्हालगी पतपेढी के संचालक पद पर रहते हुए सुभाष साटम के घोटाले और दूसरी पत्नी के साथ मिलकर सरकारी राजस्व को हड़पने और जाली मृत्यु प्रमाणपत प्राप्त करने की जांच की मांग की है।

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