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पालघर में कोरोना संक्रमित नवजात शिशु की मौत, प्रशासन के इंतजामो की खुली पोल

पालघर : जन्म लेते ही पालघर में कोरोना संक्रमित पाए गए नवजात शिशु की इलाज के दौरान करीब एक हफ्ते में ही मौत हो गई. कहा जारहा है की इस बच्चे की मौत समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण हुई है. अगर इस बच्चे को समय पर इलाज मिला होता तो उसकी जान बच जाती थी .

बताया जा रहा है की करीब एक हफ्ता पहले पालघर जिले के सफाले की रहने वाली एक गर्भवती महिला को डिलेवरी के लिए पालघर में एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था. 30 मई को हुई डिलेवरी के कुछ घंटे बाद जब नवजात बच्ची और उसके माँ का एंटीजन टेस्ट किया गाय तो करीब 6 घंटे पहले जन्मी बच्ची का रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव मिला जबकि उसकी का रिपोर्ट निगेटिव पाया गया था.
जिसके बाद इस शिशु को दुसरे हॉस्पिटल भर्ती करने के लिए उसके परिवार के लोग एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में रात करीब डेढ़ बजे तक भटकते रहे, लेकिन सुविधा का अभाव होने का बहाना बताकर जब कोई अस्पताल बच्चे को एडमिट करने के लिए तैयार नहीं हुवा, तब देर रात पालघर से करीब 70 कि.मी. दूर इस बच्ची को जव्हार के जव्हार कुटीर हॉस्पिटल (सरकारी) में रेफर कर दिया गया था .जहा कुपोषित बच्चों का इलाज होता है .लेकिन 4 दिन बाद बच्चे की हालत को देखते हुए उसे नाशिक रेफर कार दिया गया जहा इलाज के दौरान शनिवार को उसकी मौत हो गई .

प्रशासन के इंतजामो की खुली पोल

कोरोना की तीसरी लहर को लेकर शासन ,प्रशासन भले ही बड़े बड़े दावा करले लेकिन पालघर में कोरोना पॉजिटिव आने के बाद जिस प्रकार इस नवजात शिशु के परिवार के लोंग इलाज के लिए शिशु को लेकर इधर उधर भटक रहे थे . और उसके बाद कोईं इंतजाम नहीं होने के कारण कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए जव्हार में बने कुटीर हॉस्पिटल में कुपोषित बच्चों के बीच इस संक्रमित बच्ची को भर्ती करना पड़ा इस घटना ने पालघर जिला प्रशासन द्वारा संक्रमित बच्चों के लिए किये गए सारे इंतजाम का पोल खोलकर रख दिया.ऐसे में अगर आने वाले समय में बड़े पैमाने पर बच्चे कोरोना संक्रमित होते हैं तो उनका इलाज राम भरोसे रहेगा.

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