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पुलिस से पहले निजी कम्पनी के सुरक्षा गार्ड करते है चुनौती का सामना : गृहराज्य मंत्री

नई दिल्ली, 23 नवम्बर (हि.स.)। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटी एंड सेफ्टी मैनेजमेंट (आइआइएसएसएम) के 27वें वैश्विक सम्मेलन का दिल्ली कैंटोनमेंट स्थित मानेकशॉ सेंटर में केंद्रीय गृहराज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर (प्रभारी निजी सुरक्षा एवं पुलिस आधुनिकीकरण) द्वारा गुरुवार को उद्घाटन किया। अहीर ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

हंसराज अहीर ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां वास्तव में देश की सुरक्षा में कार्य कर रही हैं। आज देश में कहीं भी कुछ होता है तो पुलिस के पहुंचने से पूर्व निजी सुरक्षा कर्मी ही प्रथम चुनौती का सामना करते हैं। केंद्र सरकार अधिक से अधिक रोजगार युवाओं को देना चाहती है। सुरक्षा एजेंसियां देश की दोनों आवश्यकताओं को पूरा कर रही है। पसारा एक्ट में मूलभूत परिवर्तन अवश्य किया जाएगा। आधुनिक तकनीकों को इसमे शामिल किया जाएगा। इस सम्मेलन में किए चिंतन के अमृत विचारों पर सरकार विचार करेगी। देश की सुरक्षा में किए जा रहे प्रयासों को सरकार पूरा सम्मान देगी। अहीर ने अपनी गृह लोकसभा क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि वहां पर बड़े स्तर पर कोल इंडिया और कई कम्पनियों की खान एवं सीमेंट कारखाने है। पर्याप्त ट्रेनिंग के अभाव में वहां बड़े स्तर पर माफिया भ्रष्टाचार कर रहें है। देश की इतनी लंबी सीमाएं हैं। देश की बाह्य के साथ आंतरिक सुरक्षा भी अति आवश्यक हैं। दिल्ली में 01 लाख 80 हजार और 04 हजार से ज्यादा गृह विभाग के है लेकिन सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग के अभाव में उतना प्रभावी नही हो पा रहे हैं। सुरक्षा उधोग न केवल मांग कर बल्कि रास्ता भी सुझाएं। सुरक्षा एजेंसियों की आधुनिकीकरण को अपनाना चाहिए। ड्रोन जैसे उपकरण आज समय की आवश्यकता हैं। केंद्र ने म्यांमार सीमा पर रोहिंग्या को रोकने में अहम सफलता हासिल की हैं। 
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ भाजपा सांसद और आइआइएसएसएम के संस्थापक अध्यक्ष आर के सिन्हा ने कहा कि प्राइवेट निजी सुरक्षा अधिनियम (पसारा) 2005 में पारित हुआ जो 1980 से अस्तित्व में था। सबसे पहले पसारा एक्ट महाराष्ट्र में बनाया गया। 1983 में एक ड्राफ्ट बनाया। 1990 में चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने तब भी यह आगे नही बढ़ पाया। लेकिन इसपर सहमति नही हुई। 1991 में पहला सेमिनार ताजमानसिंह होटल में हुआ। 

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सुरक्षा उधोग को प्राथमिकता देते हुए सुरक्षा गार्ड को स्किल्ड श्रेणी में जगह दी। न्यूनतम वेतन 40 से 60 प्रतिशत बढ़ा है। पसारा एक्ट की 11 साल बाद समीक्षा आवश्यक हैं। इसमें भ्रष्टाचार शुरू हो गया है उसपर रोक लगाना जरूरी हैं। प्रशिक्षण का जो इस एक्ट में रेफरेंस दिया गया है वो बड़ा ढुलमुल हैं। केंद्र की नियमावली में हर राज्य ने अपने अनुसार इसमें बदलाव कर दिए। इससे सुरक्षा उधोग में दिक्कतें आ रहीं हैं। कैश लॉजिस्टिक के लिए आजतक नियमावली नहीं बनी। इसकी फाइल ऊपर नीचे हो रही हैं। कैश वैन में लूट से देश को नुकसान पहुंच रहा हैं। इसमें संसोधन अति आवश्यक हैं। सुरक्षा उधोग के बढ़ने से राष्ट्र की सुरक्षा के साथ रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। हमारे सुरक्षाकर्मियों का उपयोग राष्ट्र की सुरक्षा में भी सरकार ले सकती हैं। उन्होंने मांग की सुरक्षा से जुड़े उपकरणों पर जीएसटी नहीं होना चाहिए क्यों कि यह सुरक्षा से जुड़े है किसी भव्यता से नहीं।

आइआइएसएसएम अध्यक्ष एसके शर्मा ने संस्था द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि सुरक्षा उद्योग देश मे सबसे ज्यादा रोजगार बढ़ाने वाला व्यवसाय हैं। 

इस मौके पर अहीर, सिन्हा द्वारा आइआइएसएसएम कॉन्क्लेव-2017 बुक भी जारी की गई।

उल्लेखनीय है कि इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ सिक्योरिटी एण्ड सेफ़्टी मैनेजमेंट (आइआइएसएसएम) सफलतापूर्वक पिछले 27 वर्षों से सुरक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रही है। ये संस्था आन्तरिक सुरक्षा, निरापदता (सुरक्षा), अग्नि शमन, सुरक्षा, निरापदता और अग्निशमन में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न सुरक्षा उपकरणों, आपदा प्रबंधन और कार्य निरंतरता योजना (आपदा नियंत्रण) इत्यादी विषयों पर पिछले 27 वर्षों से देश में जागरुकता फैलाने, इन उद्योगों से जुड़े लोगों के अल्पकालीन और दीर्घकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आयोजित करने और भारत सरकार और राज्य सरकारों के समक्ष इन उद्योगों का पक्ष प्रस्तुत करने का कार्य सफलतापूर्वक कर रही है। इस दो दिवसीय सम्मेलन में देश व दुनिया भर से निजी सुरक्षा एजेंसी से जुड़े 800 से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा लें रहें हैं। 

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