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शहीद गरुड़ कमांडो ज्योति प्रकाश को मिला अशोक चक्र सम्‍मान , भावुक हुए राष्ट्रपति

नई दिल्ली, 26 जनवरी (हि.स.)। बिहार के रोहतास जिले के निवासी शहीद गरूड़ कमांडो ज्योति प्रकाश निराला को गणतंत्र दिवस के अवसर पर अशोक चक्र से सम्मानित करते समय राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भावुक हो गए। 

राजपथ पर गणतंत्र दिवस समारोह में शहीद की पत्नी सुषमा और उनकी माता मालती देवी को श्री कोविंद ने यह सम्मान प्रदान किया। अशोक चक्र से सम्मानित होने वाले शहीद ज्योति प्रसाद निराला भारतीय वायु सेना के पहले कमांडो हैं। पुरस्कार देते समय राष्ट्रपति भावुक हो गए| उन्हें आंसू पोंछते देखा गया।

उल्लेखनीय है कि अशोक चक्र सम्मान शांति काल में अदम्य साहस, पराक्रम और वीरता के लिए प्रदान किया जाता है। सामान्य तौर पर आतंकवाद के खिलाफ सेना के जवानों की ही भूमिका अधिक रहती है। इसके चलते उनका बलिदान होता है और उन्हीं में से किसी अदम्य साहस का प्रदर्शन करने वाले सैनिक को अशोक चक्र से सम्मानित किया जाता है। ज्योति प्रकाश निराला ने भारतीय वायु सेना की गरुड कमांडो फोर्स में रहते हुए एक प्रकार से दूसरी सर्जिकल स्ट्राइक में हिस्सा लिया और आतंकियों का सफाया करते हुए उनका बलिदान हुआ।

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बात बीते साल 18 नवम्बर की है। खुफिया सूचना के बाद सुरक्षाबलों ने जम्मू कश्मीर के हाजिन क्षेत्र में घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया तभी आतंकियों से मुठभेड़ शुरू हो गई। आतंकियों से मुकाबला करते हुए निराला अपनी मशीनगन से आतंकियों पर कहर बनकर टूट पड़े और तीन आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। इस मुठभेड़ में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 6 आतंकियों को सेना ने मार गिराया। मारे जाने वाले आतंकियों में लश्कर-ए-तैयबा आतंकी संगठन के मुखिया जकी-उर-रहमान लखवी का भतीजा भी था।

इस गोलीबारी में निराला को भी गोलियां लगीं और वे शहीद हो गए। निराला की इसी अदम्य वीरता के लिए ही मरणोपरांत उन्हें शांतिकाल का सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। निराला ने जिस वक्त देश की रक्षा करते हुए शहादत दी उस वक्त उनकी आयु 31 साल थी। निराला वायु सेना के पहले सैनिक हैं, जिन्हें जमीनी कार्रवाई के लिए मरणोपरांत यह सम्मान दिया गया।

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