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हृदय रोगियों के लिए वरदान बने चीनी वैज्ञानिक , रॉकेट से बना डाला कृत्रिम दिल

नई दिल्ली (ईएमएस)। चीनी वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कृत्रिम हृदय तैयार किया है, जो रॉकेट तकनीक पर आधारित है। दरअसल, वैज्ञानिकों द्वारा इस कृत्रिम हृदय को बनाने में रॉकेट प्रणाली की मैग्नेटिक और फ्लुइड लेवीटेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कारपोरेशन के अंतर्गत आने वाली चाइना एकेडमी ऑफ लांच व्हीकल टेक्नोलॉजी और टेडा इंटरनेशनल कार्डियोवैस्कुलर हॉस्पिटल ने मिलकर इस हृदय को तैयार किया है।

फिलहाल इसका परीक्षण किया जा रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक परीक्षण के सफल होने पर हृदय रोगियों के लिए यह वरदान साबित होगा। मैग्नेटिक एंड फ्लुइड लेवीटेशन तकनीक के जरिए कृत्रिम हृदय में पंपिंग प्रक्रिया को सहज करके घर्षण को कम किया जा सकेगा। इससे यह बेहतर तरीके और अधिक समय तक काम कर सकेगा। इसमें मौजूद ऊर्जा स्रोत भी अधिक समय तक सक्रिय रहेगा। इसके जरिए रक्त को पहुंचने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा और मानव शरीर में रक्त परिसंचरण प्रक्रिया के लिए पंप अधिक समय तक काम करेगा। चीन को अभी कृत्रिम हृदय आयात करने पड़ते हैं। ऐसे में एक हृदय 1.52 लाख डॉलर का पड़ता है।

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अगर चीन खुद ही कृत्रिम हृदय बनाने लगे तो इससे उसकी कीमत भी कम हो जाएगी। ज्यादा से ज्यादा हृदय रोगी उसका लाभ उठा सकेंगे। 2013 में वैज्ञानिकों ने मानव निर्मित हृदय को एक भेड़ में लगाया था। वह अच्छी सेहत में 120 दिन जीवित रही। इसके बाद हृदय को छह अन्य भेड़ों में लगाया गया। सभी भेड़ सौ से अधिक दिन जीवित रहीं। अब वैज्ञानिक इस तकनीक पर कुछ और परीक्षण कर रहे हैं। उम्मीद है कि 2020 से पहले इसका इंसानों पर प्रयोग शुरू हो जाएगा।

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