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सेंट्रल टीम ने बढ़ाई ममता सरकार की मुश्किलें, पूछा-किस आधार पर जारी हो रहे मृत्यु प्रमाण पत्र ?

कोलकाता । पश्चिम बंगाल में कोरोना संक्रमण की वजह से बने हालात का जायजा लेने पहुंची अंतर मंत्रालयी केंद्रीय टीम (आईएमसीटी) ने राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ानी शुरू कर दी है। कोलकाता पहुंची टीम के लीडर अपूर्व चंद्र ने राज्य के मुख्य सचिव राजीव सिन्हा को चिट्ठी लिखी है जिसमें सेंट्रल टीम को क्षेत्रों का दौरा करने के लिए आवश्यक मदद उपलब्ध कराने के साथ-साथ कई जानकारियां मांगी है।

इसमें राज्य सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि कोविड-19 पॉजिटिव व्यक्ति की अस्पताल में मौत के बाद वहां के डॉक्टर के बजाय राज्य सरकार द्वारा गठित ऑडिट टीम किस आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर रही है, इसका क्या तरीका है बताया जाए। सोमवार को सुबह 10:00 बजे के करीब कोलकाता पहुंची दो टीमों में से एक टीम सिलीगुड़ी गई थी और दूसरी कोलकाता। इसे लेकर राज्य सरकार ने आरोप लगाया था कि केंद्र की टीम राज्य सरकार को अंधेरे में रखकर बंगाल आई है और उनसे किसी तरह से संपर्क नहीं साधा। उल्टे मदद के लिए बीएसएफ और एसएसबी के पास चली गई।

इसके अलावा राज्य सरकार की ओर से सहयोग नहीं मिलने पर केंद्र ने चेतावनी भरी चिट्ठी लिखी थी जिसमें कार्रवाई करने को चेताया था। इसके बाद राज्य ने केंद्रीय टीम को हर तरह की मदद करने का आश्वासन तो दे दिया था लेकिन 3 दिन बीत जाने के बाद भी टीम को कोई मदद नहीं दी गई। अब अपूर्व चंद्र ने जो चिट्ठी राजीव सिन्हा को लिखी है उसमें राज्य सरकार के कई दावे झूठे साबित हो रहे हैं। अपनी चिट्ठी में राज्य से संपर्क नहीं करने के दावे को झूठा साबित करते हुए उन्होंने लिखा है कि सोमवार सुबह 10:00 बजे उतरने के साथ ही मुख्य सचिव राजीव सिन्हा से संपर्क साधा गया था जिसमें मिलने के लिए समय और केंद्रीय टीम के लिए आवश्यक लॉजिस्टिक सपोर्ट मांगी गई थी। उनके रहने, खाने, क्षेत्रों का दौरा करने के लिए वाहन उपलब्ध कराने और सुरक्षा के लिए पीपीई के साथ अन्य आवश्यक सहयोग का अनुरोध किया गया था लेकिन शाम 6:00 बजे सिन्हा ने उनसे सचिवालय में मुलाकात की। कोई मदद उपलब्ध कराने के बजाय दूसरे दिन 11:00 बजे मीटिंग करने की बात कही गई जिसमें बताया गया था कि राज्य स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक प्रेजेंटेशन दिखाया जाएगा लेकिन यह मीटिंग भी नहीं की गई।

मजबूरन केंद्रीय टीम बीएसएफ मुख्यालय में शरण लेकर ठहरी रही। विवाद गहराने पर गुरुसदय रोड स्थित बीएसएफ मुख्यालय में जहां टीम ठहरी हुई थी, वहां मुख्य सचिव पहुंचे और मदद का आश्वासन दिया। लेकिन कोई सुरक्षा सूट और अन्य जानकारियां उपलब्ध नहीं कराई गई। उल्टे पुलिस अधिकारियों की देखरेख में टीम को घूमने को कहा गया जिन्हें संक्रमण संबंधी हालात के बारे में लगभग कुछ भी जानकारी नहीं है। अपूर्व चंद्र ने जो चिट्ठी लिखी है उसमें राज्य सरकार से कई सवाल पूछे हैं और इससे संबंधित लिखित जवाब देने को कहा गया है। इसमें पूछा गया है कि क्या राज्य सरकार के पास सैंपल जांच के लिए पर्याप्त किट है? क्या राज्य सरकार ने अपने पास मौजूद परीक्षण सुविधाओं का संपूर्ण उपयोग किया है या कर रहे हैं? परीक्षण के लिए क्या प्रोटोकॉल अपनाए गए हैं ? क्या यह प्रोटोकॉल कोविड-19 परीक्षण के लिए स्वीकृत है? पीपीई और मास्क जैसे सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और कोविड-19 अस्पतालों में स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए इसका वितरण कितना हुआ है इस बारे में जानकारी दी जाए।

मृत्यु प्रमाण पत्र पर विशेष रूप से जानकारी तलब करते हुए चिट्ठी में लिखा है कि राज्य सरकार द्वारा गठित डॉक्टरों की एक समिति द्वारा कोरोना से मरने वालों के मृत्यु प्रमाण पत्र अनुमोदित करने की प्रणाली क्या है? इसके अलावा आईएमसीटी को यह भी बताया जाए कि संघरोध केंद्रों में लोगों की पहचान करने और उन्हें जांच आदि कि प्रक्रिया क्या है।‌ केंद्रीय टीम ने यह भी पूछा है कि क्या राज्य सरकार को लॉकडाउन के प्रावधानों का पालन करने में कोई समस्या है। या कोई अगर इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है तो बताया जाए ताकि हम मदद कर सकें। अपने लिए सुरक्षा सूट की मांग करते हुए अपनी चिट्ठी में अपूर्व चंद्र ने यह भी लिखा है कि केंद्रीय टीम विभिन्न अस्पतालों, संगरोध केंद्रों, हॉटस्पॉट क्षेत्रों और बाजारों में जाकर लोगों से मिलना चाहेगी। यहां स्वास्थ्य पेशेवरों, आइसोलेट किए गए लोगों और आम जनता के साथ संवाद करना चाहते हैं। इसलिए टीम के साथ स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय निकाय और संबंधित विभागों के अधिकारियों को भेजा जाए।

टीम लीडर अपूर्व चंद्र ने अपने साथ पुलिस की टीम नहीं भेजने का अनुरोध किया है क्योंकि उन्हें लॉकडाउन के क्रियान्वयन अथवा स्वास्थ्य संबंधी उपायों पर सीमित अथवा कोई भी जानकारी नहीं होती है। इसके अलावा इस टीम ने अपने लिए पीपीई और अन्य लॉजिस्टिक सहयोग भी मांगा है। अपूर्व ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार जल्द से जल्द इस पर कदम उठाए ताकि केंद्रीय टीम अपना काम आगे बढ़ा सकें।

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