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भविष्य डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का है

– डॉ. राकेश राणा

भारत में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र व्यापक है। हैल्थ सर्विसेज का भारतीय बाजार 100 अरब डॉलर से भी अधिक का है। एक अनुमान के तहत जल्दी ही इसके 280 अरब डॉलर तक पंहुच जाने की संभावना है। हमारी हेल्थ इंडस्ट्रीज में अस्पताल, मेडिकल उपकरण, मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन, मेडिकल एप्लीकेशन, क्लिनिकल टैक्नोलॉजी, स्वास्थ्य-बीमा और टेली-मेडीसिन शामिल हैं। भारतीय समाज में इतना वैविध्य है कि यहां स्वास्थ्य सेवाओं में अपार संभावनाएं है। भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर का बहुत अभाव है। हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली संसाधनों के अभाव में बहुत खराब हालत में है। जिस तरह देश में बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है और सार्वजनिक क्षेत्र उनके हिसाब से कम पड़ रहा है। यही वजह है निरन्तर निजी स्वास्थ्य क्षेत्र विस्तार पा रहा है। आंकड़े बता रहे हैं कि भारत में डायबिटीज के सबसे अधिक मरीज हैं। वहीं हमारे पास प्रति 1000 व्यक्तियों पर सिर्फ 0.6 डॉक्टर हैं।

हमारे यहां स्पेशिएलिटी, सुपर स्पेशिएलिटी तथा तीसरे दर्जे की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाले अस्पतालों की मांग काफी तेजी से बढ़ रही है। इसी का परिणाम है कि वैश्विक स्वास्थ्य सेवा संगठनों की स्वास्थ्य सेवाओं का जाल फैलता जा रहा है। उनके संस्थान तेजी से खुल रहे हैं। भारत में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र व्यापक संभावनाओं वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है। फिर भी इसके विकास की गति बेहद धीमी है। मांग और आपूर्ति में सबसे बड़ी बाधा संसाधनों का अभाव है। जनसंख्या और भोगौलिक विस्तार की दृष्टि से आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हमें इस समस्या से निजात दिला सकता है। स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटलाइज्ड करके इस दिशा में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन लाए जा सकते हैं।

डिजिटल सेवाएं हमें स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना सकती हैं। जनसंख्या की दृष्टि से हैल्थ सेवाएं डिजिटल माध्यम से ही सबको मुहैया करायी जा सकती है, भविष्य भी डिजिटल हैल्थ सर्विसेज का ही है। हाल का कारोना संकट इस भविष्य को जरूरी बता रहा है। हमें स्वास्थ्य क्षेत्र में टैक्नोलॉजी को बड़े स्तर पर उपयोग में लेना होगा। जहां स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना बहुत दुरुह है डिजिटल माध्यमों से वहां इस काम को आसानी से किया जा सकता है। टैक्लोनॉजी के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं सर्वसुलभ बनायी जा सकती है। गुणवत्ता की दृष्टि से बेहतर तथा समय, उर्जा व खर्च के लिहाज से उनमें गुणात्मक परिवर्तन लाए जा सकते हैं। अपने गांवों, कस्बों और नगरों व महानगरों में स्वास्थ्य सेवाओं का एक प्रभावी नेटवर्क इसके जरिए विकसित कर सकते हैं।

जनसंख्या के लिहाज से चिकित्सकों की कमी हमारे यहां बड़ा मुददा है, जिसके कारण स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र का विस्तार भी सीमित दायरे तक है। इसीलिए स्वास्थ्य केन्द्रों पर क्षमता से ज्यादा भार है। जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है। टेली-मेडिसिन की मदद से इसमें क्रांतिकारी बदलाव लाए जा सकते हैं, व्यापक क्षेत्र में चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकती हैं। टेली-मेडिसिन का प्रचलन तेजी से बढ़ भी रहा है। बड़े अस्पतालों ने टेली-मेडिसिन सेवाएं शुरू कर भी दी हैं। एक अनुमान है कि टेली-मेडिसिन सेवाओं का बाजार 75 लाख अमरीकी डॉलर है। जो सालाना 20 प्रतिशत की वृद्धि दर से बढ़ रहा है। कोरोना संकट के बाद से यह बाजार और तेजी से बढ़ने वाला है। बहुराष्ट्रीय कम्पनियां अपनी इजाद की गई नयी दवाओं, तकनीकों और उपकरणों के लिए नए बाजार खोजेंगी। ऑनलाइन टैक्नोलॉजी का बाजार बढ़त बनायेगा।

शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में तकनीकी बिक्री की अपार संभावनाएं हैं। विकसित देशों पर विकासशील देशों की निर्भरता स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में और बढ़ती जायेगी। वहीं मेडिकल टूरिज्म का क्षेत्र भी नए क्षितिजों का विस्तार करेगा। जिसमें डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं अपना नया विस्तार देश के बाहर तक खोज सकती हैं। भारत मेडिकल टूरिज्म का उभरता केन्द्र बन रहा है। भारत में डेढ़ लाख से भी अधिक विदेशी प्रतिवर्ष आते हैं जो हमारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले रहे हे। टैक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर इसमें नए स्टार्टअप कर इसको तेजी से बढ़ाया जा सकता है। इससे विदेश के मरीजों को न सिर्फ अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी बल्कि उनके इलाज खर्च में भी भारी कमी आएगी। इस दिशा में भारतीय चिकित्सा परिषद-आईएमसी को नए प्रावधान के साथ नयी पहलकदमी करनी होगी। क्योंकि नवाचार को व्यापक परीक्षण और नियामक मंजूरियों की दरकार होती है। इन्हें उदार कर हमें डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के जाल का विस्तार तेजी से करना चाहिए और नयी तकनीक का लाभ समाज को देना चाहिए। इससे समाज का चिकित्सा पर होने वाला खर्च भी कम होगा और स्वास्थ्य सेवाओं तक सबकी पहुंच भी संभव हो पायेगी। स्वास्थ्य सेवा आपूर्ति के मॉडलों में नवाचार और नयी पहल तथा प्रौद्योगिकी आधारित ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाएं के सहारे स्टार्टअप में व्यापक संभावनाएं हैं।

भारत की लगभग दो तिहाई आबादी गांवों में रहती है। जहां स्टार्टअप, नवाचार और प्रौद्योगिकी के जरिये किफायती और सुलभ समाधान मुहैया कराते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में नये प्रयोग किए जा सकते हैं। ग्रामीणों में स्वास्थ्य के प्रति चेतना बढ़ी है और अपनी फिटनेस तथा स्वास्थ्य पर खर्च करने की प्रवृत्ति भी बढ़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में मेडिकल उपकरण आपूर्ति, अस्पताल प्रबंधन और मेडिसिन सप्लाई तथा घरेलू स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में स्टार्टअप बड़ी संभावनाओं वाला क्षेत्र है।

डिजिटल स्वास्थ्य सेवा का सबसे प्रभावी और परिचित प्रमाण अभी हाल में प्रधानमंत्री द्वारा ‘आरोग्य-सेतु’ एप की शुरुआत करना है। जिसे भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने कोरोना के प्रति जागरूकता हेतु बनाया है। आरोग्य सेतु एप कोरोना के लक्षण, बचाव तथा रोकथाम से जुड़ी तमाम जानकारियां उपलब्ध कराता है। यहां तक कि कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे और जोखिम का आकलन करने में भी मददगार है। इस तरह के संक्रमण से समाज को बचाने के उद्देश्य से इंफॉर्मेशन टैक्लोनॉजी के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस महत्वपूर्ण भूमिका में उभर रही है। जिसका बड़े स्तर पर प्रयोग कोरोना संक्रमण से पार पाने में चीन और दक्षिण कोरिया ने किया है। मोबाइल ब्लूटूथ, जीपीएस तथा सम्पर्क-सूत्र का उपयोग करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए कोरोना पॉजिटिव लोगों को चिन्हित किया गया। जिससे उनके उपचार और संक्रमण को राकने में मदद मिली। स्प्ष्ट है भविष्य डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का ही है। हमें इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ने की जरूरत है।

(लेखक समाजशास्त्री हैं।)

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