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गोरखपुर हादसा : CM योगी ने दिए सख्त कार्रवाई का निर्देश, विपक्ष ने मांगा इस्तीफा

लखनऊ, 12 अगस्त : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज प्रकरण में गहन जांच कर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से शनिवार को ट्वीट के जरिए यह जानकारी दी गई। मामले में मरने वालों की संख्या 60 से अधिक होने की बात कही जा रही है। वहीं शासन स्तर पर सख्ती के बाद नींद से जगा प्रशासनिक अमला अब हरकत में आ गया है। दूसरी तरफ, मामले में अब सियासत और तेज हो गयी है। कांग्रेस प्रतिनिधिमण्डल ने जहां मेडिकल कॉलेज जाकर दौरा किया। वहीं सपा से लेकर बसपा ने सरकार को घेरने में जुटे हैं। 

विपक्ष नहीं करे राजनीति

इससे पहले, शनिवार सुबह आठ बजे ही मुख्यमंत्री योगी ने स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह और चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन से मुलाकात कर उन्हें तत्काल गोरखपुर रवाना कर दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इसकी भी ट्विटर पर जानकारी दी गई है। स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि विपक्षी पार्टियों को इन मौतों का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरोप हम भी लगा सकते हैं लेकिन हम स्थिति को काबू में करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मामले में सघनता से जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा कि मुख्यमंत्री पूरी घटना पर पल-पल की नजर रखे हुए हैं। हम जांच के बाद रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेंगे। प्रदेश सरकार ने इस पूरे मामले को बेहद गम्भीरता से लिया है और मेडिकल कॉलेज प्रशासन की रिपोर्ट में बच्चों की मौत की पुष्टि के बाद मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए जा चुके हैं। सरकार ने कहा है कि मामले में दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जायेगा। इसके लिए जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी। 

कांग्रेस ने मांगा योगी और मंत्रियों का इस्तीफा

वहीं, मेडिकल कॉलेज में कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमण्डल पहुंचा और जानकारियां ली। वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। इस मौके पर गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यूपी सरकार की लापरवाही से यह हादसा हुआ। अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी थी। इस डेलीगेशन में आजाद के अलावा, प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर, डॉ संजय सिंह और पूर्व मंत्री आरपीएन सिंह थे। इन लोगों ने मरीजों व डॉक्टरों से मुलाकात के साथ पीड़ित परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी।

आजाद ने कहा कि बच्चों की मौत से बहुत दुखी हूं। यह सब सरकार की लापरवाही की वजह से हुआ। उन्होंने कहा कि सूबे के स्वास्थ्य मंत्री और प्राविधिक एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री को अपने पद से तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भी अपने उत्तरदायित्व से बच नहीं सकते, उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। आजाद ने कहा, “हमारे पास जानकारी है कि हॉस्पिटल में एक महीने से ऑक्सीजन की कमी थी। राज्य में जंगलराज हो गया है। पांच दिन में 60 बच्चों की हत्या हुई। मौत के बाद बच्चों के परिवार को जल्दबाजी में घर पहुंचा दिया गया ताकि वह किसी के सामने न आ सके। लापरवाही की जांच के लिए सांसदों की एक कमेटी बननी चाहिए।“

यह भी पढ़े : गोरखपुर हादसा : ऑक्सीजन सप्लाई ठप होने से अब तक 60 बच्चों की मौत !

अखिलेश बोले राजनीति का वक्त नहीं, मुआवजे की मांग

उधर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि अब हमारी सरकार नहीं है। अधिकारियों ने सरकार को धोखा दिया है। सरकार प्रत्येक मृतक परिवार को 50-50 लाख का मुआवाजा दे। मामले को लेकर हम भी अपनी नजर बनाये हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह राजनीति करने का समय नहीं है। हमारे ऊपर राजनीति करने का आरोप लग रहा है। हम पर विशेष समाज की मदद करने का आरोप लगा। अब सरकार इस पर ध्यान दे। उधर बहुजन समाज पार्टी के नेता सुधीन्द्र भदौरिया ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री के अंदर थोड़ी से भी शर्म बची है तो वह गोरखपुर जाकर मृतकों के परिजनों से माफ़ी मांगे। उन्हें नैतिकता के आधार पर तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। 

ऑक्सीजन आपूर्ति करने वाली फर्म के ठिकानों पर छापा

वहीं बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से 48 लोगों की मौत के बाद अब एक ट्रक में भरकर ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंच गया है। साथ ही मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन आपूर्ति करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानां पर छापेमारी की जा रही है। फर्म का मालिक मनीष भंडारी फरार बताया जा रहा है।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दो वर्ष पूर्व लिक्विड ऑक्सीजन का प्लांट लगाया गया। इसके जरिए वार्ड 6, 10, 12, 14 और 100 बेड इंसेफेलाइटिस वार्ड में मरीजों को ऑक्सीजन दी जाती है। मार्च में ऑक्सीजन आपूर्ति सप्लाई का ठेका समाप्त हो चुका था। बावजूद इसके पूर्व में ठेका पाए मालिक ने मानवीयता के आधार पर सप्लाई जारी रखी थी। बताया जा रहा है कि आपूर्ति करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स के करीब 64 लाख रुपये बकाया होने पर आपूर्ति ठप करने की सूचना दो दिन पहले प्रिंसिपल को दी थी। गुरुवार को सेंटर पाइप लाइन ऑपरेटर ने प्रिंसिपल, एसआईसी, एचओडी एनेस्थिसिया, इंसेफेलाइटिस वार्ड के नोडल अधिकारी को पत्र के जरिए दोबारा लिक्विड ऑक्सीजन सप्लाई का स्टॉक बेहद कम होने की जानकारी दी। इन सब जानकारियों और ऑक्सीजन सप्लाई रुकने की बात पहले से पता होने के बावजूद इसके पूर्ति लापरवाह रहे, इसके लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया। इसका नतीजा ये हुआ कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कई जानें चली गईं।

इस बीच मेडिकल कॉलेज में बकाया धन की वजह से ऑक्सीजन की कमी से होने वाली मौतों की संख्या 60 को पार कर गयी है। हालांकि शुरुआत में मेडिकल कॉलेज प्रशासन बच्चों की मौत को ऑक्सीजन की कमी से होने के दावे को लगातार खारिज करता रहा लेकिन आखिरकार उसकी इतनी बड़ी लापरवाही सामने आ गई। 

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