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पालघर में दूर देश से आये हैं खास मेहमान – छोटा राजहंस

संजय सिंह ,पालघर,25 जुलाई : दूर देश से कई हजारो KM का सफर तय करके पालघर जिला के अरब समुंद्र के किनारे फैले समुंद्र की खाड़ियों में आये विदेशी मेहमान छोटा राजहंस (फ्लेमिंगो पक्षी) पंक्षी प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए है .

कहते है की पक्षियों के बिना आसमान अधूरा है। आकाश में रचना में उड़ते हुए पक्षियों का झुंड एक बहुत ही प्रेरणादायक दृश्य है। प्रवास, किसी भी जाति के लिए, गर्मी और सर्दी के निवास स्थानों के बीच एक बड़े स्तर पर किया गया आवधिक गमन-आगमन है। ये पक्षियों का, अपना जीवन बचाने के लिए, समय के साथ हुआ क्रम-विकास (Evolution) है .

बता दे की हर साल बारिस के मौसम में अफ्रीका से कई हजारो KM का सफर तय करके फ्लेमिंगो पंक्षी जिन्हें हिंदी में छोटा राजहंस कहा जाता है।यह छोटा राजहंस पालघर जिले के बिभिन्न क्षेत्रो में समुंद्र के किनारे फैले समुंद्र की खाड़ियो में भोजन की खोज: कीड़ों और नए अंकुर वाले पौधों की खोज में आते है .और कुछ समय यहां गुजारने के बाद फिर वह अपने मुल्क चले जाते है । यह सिलसिला काफी सालो से चल रहा है ।

हर साल की तरह इस साल भी करीब 50 से 60 छोटा राजहंस की एक टोली भोजन की तलाश में केलवे बिच से कुछ दुरी पर स्तिथ दांडा खटाली के समुंद्र की खाड़ियो में आये हुए है .

इनके लम्बे गर्दन,लम्बी टांगे,लम्बी चोच यह पंक्षी प्रेमी के लिये काफी आकर्षक होते है . इनके हलके गुलाबी रंग के पंख को देखते हुए इन्हें लोग अग्निपंख भी कहते है.इनकी उंचाई करीब 90 सेमी ऊँची होती है और इनकी आँखे इनके मस्तिक से बड़ी होती है .

जिस प्रकार यह पानी के अंदर काफी सभ्य तरीके से एक साथ पानी के अंदर अपने भोजन की तलाश करते है. इनकी यह सभ्यता पंक्षी प्रेमियों के आँखों को सुख पहुँचाने वाला काफी सुखद पल होता है.

 छोटा राजहंस, राजहंस की एक प्रजाति है यह अफ्रीका, अमेरिका, एशिया, यूरोप के कुछ भागों और भारत के कच्छ तथा चिल्का झील में मुख्य रूप से पाये जाते है। राजहंस एक मिलनसार पंक्षी माना जाता है. और इन्हें झुंड में रहना काफी पसंद है . और शिकारियों से खुद को बचाने के लिए यह हमेशा झुंड में ही रहते हैं. इसका रंग गुलाबी या गुलाबीपन लिये सफ़ेद होता है। इनका गुलाबी रंग इनकी भोजन में करोटीन होने के कारण होता है।

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