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लेनिन की मूर्ति पर घमासान, लेफ्ट हुआ लाल -स्वामी बोले, लेनिन आतंकवादी

अगरतला (ईएमएस)। त्रिपुरा के बेलोनिया टाउन में कॉलेज स्क्वेयर स्थित रूसी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति गिराने और उसके बाद शुरू हुई हिंसा पर पूरा लेफ्ट लाल हो गया है। घटना पर सभी वामपंथी दलों ने कड़ी नाराजगी जताते हुए बीजेपी पर डर फैलाने का आरोप लगाया है। बीजेपी की सहयोगी जेडीयू के सांसद हरिवंश ने भी इस तरह की घटना की निंदा की है। सीपीआई नेता डी. राजा ने कहा, मैं इस हिंसा की कड़ी निंदा करता हूं, यह लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं है। हम एक बहुपक्ष लोकतंत्र हैं, कुछ पार्टियां जीतती हैं और कुछ हार जाती हैं। इसका यह कतई मतलब नहीं है कि वे बर्बरता हिंसा का सहारा ले सकते हैं। कानून को कड़ा रुख अपनाने की जरूरत है।

वहीं सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा, त्रिपुरा में जो हिंसा हो रही है, ये स्पष्ट है कि आरएसएस-बीजेपी का रुझान क्या है। हिंसा के अलावा उनका राजनीतिक भविष्य कुछ है नहीं। त्रिपुरा की जनता इसका जवाब देगी। सीपीएम ने लेनिन की मूर्ति तोड़ने की घटना पर ट्विटर पर लिखा, त्रिपुरा में चुनाव जीतने के बाद हुई हिंसा प्रधानमंत्री के लोकतंत्र पर भरोसे के दावों का मजाक उड़ाती है। त्रिपुरा में वामपंथी और उनके समर्थकों के बीच डर और असुरक्षा की भावना फैलाने की कोशिश की जा रही है। केन्द्र व बिहार में बीजेपी की सहयोगी पार्टी जेडीयू के सांसद हरिवंश ने कहा, यह गलत है, इस राष्ट्र के लोग अलग-अलग विचारधाराओं में विश्वास रखते हैं।

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यह सही है कि शासन समाप्त होने के बाद रूस में भी लेनिन की सभी मूर्तियों को नष्ट कर दिया गया था। लेकिन भारत, रूस नहीं है। लेनिन 1970 में गरीबों के लिए एक बड़ी क्रांति लाए थे। हालांकि लेनिन पर बोलते हुए जेडीयू सांसद की जुबान फिसल गई और वह 1917 की जगह 1970 बोल गए। इस पूरे मामले पर विवादित बयानों के लिए चर्चित सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, लेनिन तो विदेशी है, एक प्रकार से आतंकवादी है, ऐसे व्यक्ति की मूर्ति हमारे देश में क्यों? वे कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्यालय के अंदर मूर्ति रख सकते हैं और पूजा कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा त्रिपुरा के राज्यपाल को कानून व्यवस्था पर नजर बनाए रखने को लेकर लिखे गए पत्र की खबरों के बीच गवर्नर तथागत रॉय के ट्विटर हैंडल पर इसका खंडन किया गया है। तथागत की ओर से ट्विटर पर लिखा गया है कि उन्हें केन्द्रीय गृहमंत्री की ओर से इस तरह का कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। त्रिपुरा में आपको बता दें कि त्रिपुरा में 25 साल बाद लेफ्ट के लालकिले को ढहाते हुए बीजेपी ने पहली बार सत्ता हासिल की। त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 35 सीटें हासिल की हैं। वहीं, उसके सहयोगी दल आईपीएफटी के साथ राज्य की कुल 43 सीट पर कब्जा किया है।

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