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OBC आरक्षण , अशोक चव्हाण का केंद्र पर हमला बोले, मध्य प्रदेश की तरह महाराष्ट्र का नहीं किया सहयोग

मुंबई –  महाराष्ट्र के लोक निर्माण मंत्री और मराठा आरक्षण पर कैबिनेट उप-समिति के अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने पूछा है कि मध्य प्रदेश में ओबीसी के राजनीतिक आरक्षण को स्थगित करने के बाद केंद्र सरकार ने जो तत्परता दिखाई है. वह मराठों के आरक्षण में क्यों नहीं दिखाई गई. मध्य प्रदेश में ओबीसी के राजनीतिक आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह बात सामने आई है कि केंद्र सरकार ने इसे चुनौती देने के लिए तत्काल कदम उठाए हैं.

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चव्हाण ने कहा कि अगर केंद्र ओबीसी को न्याय दिलाने के लिए पहल कर रहा है तो इसका स्वागत है. यह बताया गया है कि केंद्र, साल 2010 के जस्टिस कृष्णमूर्ति के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा, जिसने ओबीसी के राजनीतिक आरक्षण के लिए ‘ट्रिपल टेस्ट’ की शर्त लगाई थी. महाराष्ट्र में ओबीसी के राजनीतिक आरक्षण के लिए महाविकास आघाड़ी सरकार द्वारा हाल ही में दायर याचिका जस्टिस कृष्णमूर्ति के फैसले की चपेट में आ गई थी.

चव्हाण ने आरोप लगाया कि केंद्र ने महाराष्ट्र में ओबीसी की मदद के लिए कुछ नहीं किया, केंद्र का वही नुकसान मराठा आरक्षण मामले में भी देखने को मिला. हमारी मांग थी कि केंद्र सरकार को इंद्र साहनी फैसले में 50 फीसदी की शर्त में ढील देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए. हालांकि, केंद्र सरकार ने उस समय महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण में सहयोग नहीं किया था. उन्होंने कहा कि आरक्षण एक संवेदनशील मुद्दा है. केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी द्वारा आरक्षण को राजनीतिक रूप से अवसरवादी रुख अपनाना उचित नहीं है. चूंकि महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार नहीं है, इसलिए वह महाराष्ट्र में मराठों और ओबीसी के लिए राजनीतिक आरक्षण के मुद्दों पर चुप है.

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