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जागरूकता बढ़ाएंगी वर्चुअल रैलियां

– डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ अपना एक वर्ष पूरा किया। अगले कुछ महीने में बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा के चुनाव भी होने हैं। यदि कोरोना आपदा न होती तो इस समय राजनीति के मंच सज रहे होते। वैसे कांग्रेस जिस प्रकार सरकार पर हमला बोल रही है, उससे लगता है कि वह चुनावी मोड में है। भाजपा ने कोरोना आपदा राहत व प्रबन्धन को वरीयता दी। केंद्र व प्रदेशों में उसकी सरकारें जी जान से इस आपदा के मुकाबले में लगी हैं। यह उसके लिए अपनी उपलब्धियां बताने का समय हो सकता था लेकिन कोरोना संकट के कारण उसने ऐसा नहीं किया। भाजपा द्वारा जो वर्चुअल रैली आयोजित की जा रही है, उनको भी कोरोना जागरूकता से जोड़ दिया गया है। ये बात अलग है कि इस संकटकाल में कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों का भी जवाब दिया जा रहा है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि वर्चुअल रैली का चुनाव प्रचार से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य कोरोना के खिलाफ लड़ाई में लोगों के साथ जुड़ना है। शाह ने ऐसी ही एक वर्चुअल रैली की शुरुआत में कोरोना वॉरियर्स का उत्साह बढ़ाया। कहा कि यह लोग अपनी जान जोखिम में डालकर वायरस से लड़ रहे हैं। कहा कि देश एकजुट होकर कोरोना को परास्त करेगा। नरेंद्र मोदी सरकार के एक वर्ष में ऐतिहासिक निर्णय हुए हैं। ऐसी समस्याओं का समाधान हुआ, जिनका देश नाम लेना साम्प्रदायिक समझा जाता था। जम्मू-कश्मीर में तीन परिवारों के लिए अनुच्छेद 370 को बनाये रखा गया। भाजपा के एजेंडे में इसकी समाप्ति का वादा रहता था इसलिए उसे कम्युनल कहा जाता था। इस अलगाववादी अनुच्छेद के समर्थक घोर सेक्युलर कहे जाते थे। तीन तलाक पर मुस्लिम देश रोक लगा चुके थे लेकिन भारत में इसका समर्थन सेक्युलर होने का प्रमाणपत्र था। मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को इस कुप्रथा से मुक्त किया। पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान में हिन्दू, बौद्ध, सिख प्रताड़ित किये जाते थे। मोदी सरकार ने इनके साथ मानवीय कदम उठाया। नागरिकता कानून में संशोधन किया गया। इन सबसे बड़ा कार्य यह था कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

कोरोना संकट में भी मोदी सरकार ने उल्लेखनीय कार्य किये। पूरी दुनिया में इन कार्यों की सराहना की जा रही है। संकटकाल में बीस लाख करोड़ रुपये का आर्थिक पैकैज दिया। देश की अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसान, गरीब, मजदूर, व्यापारी, सूक्ष्म लघु मध्यम उद्योग से जुडे़ लोग तथा बुनकर आदि सभी वर्गों की भागीदारी संभव की गई। भाजपा ने इस आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत वर्चुअल जनसंवाद प्रारंभ किया है। कोरोना आपदा में सरकार ने श्रमिकों को मनरेगा योजना से रोजगार देने का निर्णय किया तो कांग्रेस इसका श्रेय लेने दौड़ पड़ी। उसने कहा कि यह उंसकी योजना थी। भाजपा नेताओं ने वर्चुअल रैली से इसका जवाब दिया। कहा गया कि कांग्रेस के शासन में मनरेगा के नाम पर गरीबों के हक के पैसे की किस तरह बंदरबांट होती थी। यह बात पूरा देश जानता है। पहले मनरेगा का पैसा मजदूरों को नहीं मिलता था। आज उनके खाते में पूरा पैसा पहुंच रहा है। मोदी सरकार ने इसके बीच से बिचौलिया हटा दिया है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि जब से बिचौलिये समाप्त हुए हैं, तब कांग्रेस के लोगों को परेशानी हो रही है। लेकिन अब बिचौलियों की हम एक नहीं चलने देंगे।

रविशंकर प्रसाद ने भी सोनिया गाँधी द्वारा मनरेगा के ऊपर अखबारों में लिखे गए लेख को लेकर कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला। इसी मुद्दे पर शाहनवाज हुसैन ने कहा कि सोनिया मनमोहन सरकार ने मनरेगा पर दस वर्षों में लगभग पौने दो लाख करोड़ रुपये खर्च किये थे। इसका भी बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया था। जबकि मोदी सरकार के छह वर्षों में अबतक तीन लाख पंचानबे हजार लाख करोड़ रुपये आवंटित किये जा चुके हैं। यह धनराशि सीधे मजदूरों के खाते में भेजी गई। यूपीए कार्यकाल में लूटखसोट का पर्याय बना दिया गया था। यूपीए के दस वर्षों के जमाने में मनरेगा के लिए साल की शुरुआत में मीडिया को दिखाने के लिए जो बजट आवंटित किया जाता था, उसमें भी बाद में कटौती कर ली जाती थी। जबकि मोदी सरकार ने उदारता से धन जारी कर इस योजना को नया जीवन दिया है। पहली बार मानसून के सीजन में भी मनरेगा के तहत मजदूरों को काम उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। साथ ही, मोदी सरकार ने मनरेगा के तहत फंड को भी तुरंत रिलीज करने का फैसला किया है। सरकार ने मनरेगा के तहत पूर्व बकाये का भुगतान भी राज्यों को कर दिया है। यूपीए सरकार के समय लूट, घोटाले और भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुकी मनरेगा योजना को मोदी सरकार ने प्रभावी और मजदूरों के लिए अधिक उपयुक्त बनाया है। इसके लिए कृषि क्षेत्र के इतर कार्यों की भी व्यवस्था की गई है। हर साल मनरेगा के लिए जहां अधिक बजट का प्रावधान किया है, वहीं मजदूरी को भी बढ़ाया है। मोदी सरकार ने मनरेगा को और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाया है।

यूपीए में बढ़े माओवाद व नक्सलवाद की इस सरकार ने कमर तोड़ दी है। नितिन गडकरी ने कहा कि कांग्रेस के शासन के समय वोटबैंक के लिए आतंकवादियों के तुष्टीकरण की राजनीति होती थी। बाटला हाउस आतंकियों के मरने पर तो सांत्वना देने के लिए कांग्रेस के नेता उनके घरों में गए। लेकिन आतंकियों से लड़ते हुए जो पुलिस इंस्पेक्टर शहीद हुए, उसके घर उनका कोई भी नेता नहीं गया। नरेंद्र मोदी मोस्ट रिकॉग्नाइज एंड रिस्पेक्टफुल लीडर ऑफ द वर्ल्ड के रूप में आज जाने जा रहे हैं। राष्ट्रवाद हमारी आस्था नहीं, हमारा जीवन है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्टार्टअप, स्टैंड अप, इनोवेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर डवलप हो रहे हैं। संस्कृति और विरासत के आधार पर मूल्य आधारित जीवन पद्धति से समाज को संपन्न बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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