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अस्पतालों में इलाज व सुविधाओं की कमी पर कांग्रेस ने केंद्र और दिल्ली सरकार को घेरा

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहे लोगों को बेहतर इलाज और सुविधाएं नहीं मुहैया होने को लेकर कांग्रेस ने केंद्र और दिल्ली सरकार को निशाने पर लिया है। उसने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में संक्रमण की स्थिति भयावह है बावजूद इसके दोनों सरकारों ने कुछ काम नहीं किया। विपक्षी पार्टी ने आरोप लगाते हुए कहा कि जहां आम आदमी पार्टी की सरकार सवालों से बचने के लिए कभी केंद्र सरकार, कभी निजी अस्पताल तो कभी पड़ोसी राज्यों से लड़ने में लगी है। वहीं केंद्र की मोदी सरकार भी इस आड़ में जवाब देने से बच रही है।

कांग्रेस नेता एवं पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अजय माकन ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राजधानी दिल्ली में कोरोना की पॉजिटिविटी रेट देश में सबसे ज्यादा है, वहीं रिकवरी रेट सबसे कम है। इस स्थिति में टेस्ट बढ़ाए जाने चाहिए थे, लेकिन वो दिन-प्रतिदिन और कम हो रहे हैं। इतना ही नहीं राज्य में आठ जांच लैब को सस्पेंड कर दिया गया है, जहां रोजाना चार हजार टेस्ट हो रहे थे। उन्होंने सवाल किया कि बीते 29 मई को दिल्ली में 7,650 टेस्ट हुए थे, जबकि कल मात्र 5,180 टेस्ट हुए। ऐसे में दिल्ली सरकार बताए कि किस रणनीति के तहत राज्य में कोरोना जांच की संख्या घटाई गई। प्रभावित लोगों को पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं मुहैया कराना सुनिश्चित करने के बजाय दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले 38 अस्पताल में से 33 में कोरोना मरीजों का इलाज नहीं किया जा रहा है।

सर गंगाराम अस्पताल के खिलाफ दर्ज एफआईआर के मुद्दे पर माकन ने कहा कि दिल्ली में कोरोना मरीजों के लिए 4400 बेड हैं। इनमें से 3,156 बेड खाली हैं। फिर भी दिल्ली के लोगों को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। निजी अस्पताल में 40 फीसदी बेड खाली हैं। जिस गंगा राम अस्पताल के खिलाफ दिल्ली सरकार ने एफआईआर की है, उसमें 88 प्रतिशत बेड भरे हुए हैं, जबकि इसके उलट केजरीवाल सरकार के अस्पतालों में मात्र 72 फीसदी बेड खाली हैं उस पर केजरीवाल जी क्या जवाब देंगे?

कांग्रेस नेता ने कहा कि ऐसा ही कुछ हाल केंद्र सरकार के अस्पतालों का भी है। दिल्ली में 13,200 बेड केंद्र के अस्पताल और 3500 बेड म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के हैं। इन 16,700 बेड में से सिर्फ 1502 बेड कोरोना मरीजों के लिए हैं, जो कि कुल बेड का मात्र आठ फीसदी है। आखिर बड़े-बड़े दावे करने वाली केंद्र सरकार इस आंकड़े पर क्या कहेगी?

अजय माकन ने केजरीवाल सरकार को गैरजिम्मेदार बताते हुए कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 13 मार्च को ही कोरोना को महामारी घोषित कर दिया था लेकिन दिल्ली सरकार दो जून को जागी और उसने डॉ महेश वर्मा कमेटी बनाई। इस कमेटी के अनुसार इस महीने के अंत तक दिल्ली में एक लाख लोग संक्रमित होंगे। कमेटी के अनुसार 15 जुलाई तक दिल्ली में 42 हजार कोरोना बेड की जरूरत होगी और आज सिर्फ 8,600 हैं। दिल्ली में 1700 वेंटिलेटर बेड होने चाहिए लेकिन फिलहाल 472 हैं। 15 जुलाई तक 10,500 वेंटिलेटर बेड भी चाहिए होंगे। इतनी आवश्यकताओं के बावजूद केजरीवाल सरकार आंख बंद कर हकीकत देखने से बच रही है।

मृतकों के अंतिम संस्कार को लेकर भी कांग्रेस ने आप सरकार को निशाने पर लिया। कांग्रेस नेता ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम पर ‘मृतकों की गरिमा’ के बारे में बड़ी टिप्पणी की थी। कोरोना संक्रमण से हुई मौत के मामले में शव पांच दिनों तक शमशान घाट पर अंतिम संस्कार के लिए पड़ा रहता है और उनका अंतिम संस्कार नहीं हो पाता। आखिर दिल्ली सरकार और एमसीडी की क्या तैयारियां हैं? उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार सवालों से बचने के लिए अक्सर दूसरों पर आरोप लगाती रहती है लेकिन अपनी जिम्मेदारी कभी नहीं निभाती। ऐसे में स्पष्ट तौर पर केजरीवाल को समझना होगा कि सिर्फ आरोपों की राजनीतिक से काम नहीं चलेगा, आप राज्य के मुख्यमंत्री और हर परिस्थिति में जिम्मेदारी आपकी बनती है। (एजेंसी, हि.स.)

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