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महापौर उम्मीदवार चयन में संशय, फिर भी डॉ. धर्मेंद्र और अंजू पर दांव लगा सकती है भाजपा

गोरखपुर, 30 अक्टूबर (हिस)। नगर निकाय चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी में दावों के दौर शुरू है। जिला से लगायत क्षेत्रीय पदाधिकारी तक चयन को लेकर गंभीर हैं। हालांकि, संशय की स्थिति भी बनी है। बावजूद इसके दावेदारों में कई नामों पर गंभीरता से विचार जारी है। इनमें शामिल दो दावेदारों डॉ. धर्मेन्द्र सिंह और पूर्व मेयर अंजू चौधरी पर भाजपा दांव लगा सकती है। अंजू चौधरी जहां अनुभव और लोकप्रियता के बल पर आगे चल रहीं हैं तो डॉ. धर्मेन्द्र सिंह को आरएसएस, हियुवा और भाजपा का चहेता बताया जा रहा है।

पार्टी सूत्रों की मानें तो इन नामों में बहुत से ऐसे चेहरे हैं, जिन्हें इग्नोर करना खुद पदाधिकारियों को महंगा पड़ सकता है। इतना ही नहीं, संभावित उम्मीदवारों ने भी योगी के आसपास मंडराने वालों द्वारा खुद के बारे में गलत सूचनाओं से मुख्यमंत्री को भ्रमित करने वालों की लंबी लिस्ट तैयार की है। उनकी परिक्रमा करने में ही अपना भविष्य देख रहे हैं।

सूत्र कहते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का क्षेत्र होने की वजह से कोई भी जिम्मेदार चयन प्रक्रिया में आगे बढ़कर अपना विचार या मनपसंदीदा उम्मीदवार बताने से कतरा रहा है। न ही कोई संगठन के समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ता का ही नाम लेने की हिमाकत करने की सोच रहा है। यही वजह है कि प्रदेश नेतृत्व को भेजी जाने वाली लिस्ट में हर उस व्यक्ति का नाम शामिल करने की बात कही जा रही है, जिससे खुद पदाधिकारियों के हानि होने की गुंजाइश बनी है।

इतना ही नहीं, योगी से भयातुर संभावित उम्मीदवार भी खुद को किसी नेता का चहेता बताने से कतरा रहे हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री के धुर विरोधी माने जाने वाले राज्यसभा सांसद और केंद्र सरकार में वित्त राज्यमंत्री का पद संभालने वाले शिवप्रताप शुक्ला समर्थकों में सुगबुगाहट होने लगी है। वे अपने कैंडिडेट के पक्ष में खुलकर सामने आने को बेताब हैं, लेकिन अपने आकाओं के दबाव की वजह से ये समर्थक कुछ भी बोलने या सामने आने से बचना ही मुनासिब समझ रहे हैं।

योगी का सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन हिन्दू युवा वाहिनी के पदाधिकारी और स्थानीय कार्यकर्ता भी संभावित उम्मीदवारों के चयन में बाधा हैं। पार्टी के कई जिम्मेदारों का मानना है कि नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत स्तर पर पार्टी के दर्जन-दर्जन भर कार्यकर्ताओं ने उम्मीदवारी ठोंकी है। ऐसे हियुवा कार्यकर्ताओं ने एक साथ दोनों संगठनों की सदस्यता ली है। एक कार्यक्रम में एक साथ भागीदारी इन्हें एक जैसे विचारधारा के लिए प्रेरित करती है। बावजूद इसके कार्यक्रमों स्थल पर ये भाजपा के झंडा थामे कम, केसरिया फहराने वाले ज्यादा होते हैं। ऐसे में इन्हें कागजी रूप से भाजपाई तो माना जा सकता है, लेकिन आंतरिक रूप से इनकी आस्था सिर्फ और सिर्फ योगी आदित्यनाथ में है। फिर इन्हें इग्नोर करना खुद ऐसा करने वाले के लिए घातक है।
इन नामों की है चर्चा, चार पर गंभीर है पार्टी

क्षेत्रीय कार्यालय के सूत्रों की मानें तो जिन नामों पर गंभीरता से विचार हो रहा है, उनमें सीताराम जायसवाल, अंजू चौधरी, अरविन्द विक्रम चौधरी, धर्मेंद्र सिंह, शिव कुमार शर्मा, चिरंजीव चौरसिया, शशिकांत सिंह, गोपाल सिंह वर्मा, लाल बिहारी शर्मा, पद्मा गुप्ता, दयानंद शर्मा, डॉ. उषा नारायण, इंदुमती सिंह, जवाहर कसौधन और आशा जायसवाल के नाम चर्चा में शामिल हैं। फिर भी चार नामों पर गंभीरता से विचार हो रहा है।

सूत्रों की मानें तो पूर्व मेयर अंजू चौधरी, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, सीताराम जायसवाल और चिरंजीव चौरसिया इस दौड़ में सबसे आगे है। इनके नामों पर पार्टी गंभीरता से विचार कर रही है।

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