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रंगभरी एकादशी सोमवार को, धूमधाम से निकलेगी बाबा विश्वनाथ की रजत पालकी

वाराणसी, 24 फरवरी (हि.स.) । फाल्गुन शुक्ल एकादशी को रंगभरी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। सोमवार को पड़ने वाले रंगभरी एकादशी के दिन देवों के देव महादेव आदि शक्ति मां पार्वती का गौना करा अपने साथ ले जायेंगे। पर्व की शाम श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी के आवास से रेड कार्पेट पर बाबा की रजत पालकी निकाली जाएगी। पालकी में सवार बाबा विश्वनाथ और जगत जननी के बिग्रह वर-वधू रूप में बैठेगें। पालकी सवार जगत जननी गौरा सुर्ख लाल रंग के जोड़े में और बाबा खादी सिल्क से बने परिधान पहन सुर्ख लाल रंग की राजसी पगड़ी बांधेंगे। इसके बाद बाबा दरबार के नौबतखाने में शहनाई वादक पं. महेंद्र प्रसन्ना के शहनाई वादन के साथ डमरू बजते ही शिव परिवार की डोली रजत पालकी को ब्राह्मण जन कांधे पर उठाकर आवास से बाहर निकलेंगे। इसके बाद हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ परम्परानुसार पालकी पर भक्त रंग गुलाल उड़ा बाबा से परिवार में सुख समृद्धि की गुहार लगा होली पर रंग खेलने की अनुमति भी मांगेंगे।

भगवती गौरा के गौना (बिदाई ) की तैयारियां शनिवार को मंहत आवास में शुरू हो गई हैं। आवास परिवार में बेटी के विदायी का एहसास कराने वाले माहौल में मंहत परिवार के सदस्यों ने बताया कि द्वादश ज्योर्तिलिंग बाबा विश्वेश्वर दरबार में यह परम्परा 350 वर्ष पूर्व शुरू हुयी। आवास के प्रथम तल से सोमवार शाम शिव परिवार की रजत पालकी निकलेगी। पालकी में श्री काशी विश्वनाथ और भगवती पार्वती के बिग्रह के साथ भगवान गणेश का बिग्रह भी साथ में मौजूद रहेंगे। पालकी को महन्त आवास से रेड जोन होते हुए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की परिक्रमा के बाद मंदिर के मुख्य द्वार से ले जाया जाएगा। फिर पालकी से बिग्रहों को बाबा विश्वनाथ के गर्भ गृह में स्थापित किया जाएगा। 

उन्होंने बताया कि बाबा का चल विग्रह और यह सिंहासन उनके आवास पर ही रहता है। बाबा के चल विग्रह को रजत पालकी में रखते ही अबीर गुलाल चढ़ाने की परम्परा काशी में शुरू हो जायेगा। इस मौके पर महंत परिवार की ओर से अबीर गुलाल बाबा के बिग्रह पर चढ़ाकर भक्तों के बीच उड़ाया जायेगा। इसके बाद महन्त आवास से जैसे ही शिव परिवार की रजत पालिकी निकलेगी, पूरे दरबार और मुक्तांगन क्षेत्र की गलियों में भक्त अबीर गुलाल की बारिश करेंगे। महिलाएं छतों, बारजों से गुलाब की पंखुडि़यां बरसायेंगी, यह दृश्य देखने के लिए हजारो की भीड़ उमड़ पड़ेगी। 

बाबा को हर्बल अबीर गुलाल चढ़ाया जायेगा

काशी पुराधिपति बाबा विश्वनाथ के गौना रंगभरी एकादशी पर उन्हें फूलों से बने (हर्बल) अबीर गुलाल चढ़ाया जायेगा। रंगभरी एकादशी के लिए पांच कुंतल हर्बल अबीर तैयार किया जा रहा है। महन्त परिवार के अनुसार मान्यता है कि इस दिन बाबा विश्वनाथ स्वयं भक्तों के साथ होली खेलते हैं। गौना कराने जाते समय और रंग खेलते समय शाही पगड़ी सिर पर धारण करते है। जिसे लल्लापुरा सिगरा निवासी गयासुद्दीन और उनके परिवार के सदस्य तैयार कर चुके हैं। इस परिवार के वंशज पिछले तीन सौ सालों से बाबा के लिए रेशमी शाही पगड़ी तैयार करते रहे हैं। अपने पूर्वजों की इस परम्परा को थाती मान गयासुद्दीन और उनका परिवार बाबा दरबार की सेवा में जुटे रहते हैं। उनको भरोसा है कि आने वाली उनकी पीढ़ियों में भी जब तक कलाकारी होती रहेगी, बाबा के लिए रेशमी पगड़ी बनती रहेगी। पर्व पर भगवती गौरा सोने की नथिया, मांगटीका और पटेरिया हार धारण कर गौने जायेंगी। 

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