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PM मोदी अब अपने ही फैसले को सीरियसली नहीं लेते हैं, ये है सुशासन

पटना, सनाउल हक़ चंचल-

सोशल मीडिया में दो स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हो रहे हैं . दोनों प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से संबद्ध हैं . इन दोनों स्क्रीनशॉट के वायरल होने के बाद लोग कहने लगे हैं कि संपूर्ण देश को छोड़ें,अब तो नरेंद्र मोदी की बातों को स्वयं नरेंद्र मोदी ही गंभीरता से नहीं लेते हैं . मतलब ‘सब चलता है’ जिस मोड में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी भी खुद जा रहे हैं .

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सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे दो स्क्रीनशॉट में पहला नरेंद्र मोदी द्वारा 17 जून 2017 को दिन में 1 बजे किया गया ट्वीट है . इस ट्वीट के माध्यम से प्रधान मंत्री लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे किसी को शुभकामनाओं के वक़्त फूलों का बुके देने के बदले किताब भेंट करें . ऐसा किया जाना बहुत बड़े बदलाव का प्रतीक बनेगा .

17 जून को जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने यह ट्वीट किया था,तब उन्हें बहुत बधाइयां मिली थी . देश के प्रधान मंत्री की इस नई सोच को देश ने उनके ट्वीट को बड़ी संख्या में री-ट्वीट और लाइक कर सलाम किया था .

अब बात प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े वायरल होते दूसरे स्क्रीनशॉट की,जो कह रहा है कि नरेंद्र मोदी की बातें नरेंद्र मोदी ही नहीं मानते हैं . यह स्क्रीनशॉट भी मोदी के ट्वीट का ही है,जो कल संडे 1 अक्टूबर को पोस्ट किया गया था . संडे 1 अक्टूबर को देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का जन्म-दिन था .

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जन्म-दिन की शुभकामनाएं देने को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने गए थे . मुलाक़ात के वक़्त शुभकामनाओं के बाबत नरेंद्र मोदी के हाथों में राष्ट्रपति को देने के लिए कोई किताब नहीं, फूलों का बुके ही था . यह तस्वीर जैसे ही प्रधान मंत्री ने अपने ट्विटर हैंडल से पोस्ट किया,लोगों ने 17 जून वाले नरेंद्र मोदी के ट्वीट को आधार बनाकर पूछना शुरु कर दिया,बताइये प्रधान मंत्री जी,आप अपनी बातों को खुद ही नहीं मानते हैं,तो फिर  देश के आम लोग क्या करें ?

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