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कल्याण परिमंडल में 9 लाख बिजली उपभोक्तओं पर 10 करोड़ का बिल बकाया

मुंबई, 06 जुलाई (हि.स.)। बिजली महावितरण कंपनी के कल्याण परिमंडल को बिजली चोरी व बिल बकाया के कारण आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ रहा है। कल्याण परिमंडल में घरेलू, व्यवसायिक व औद्योगिक उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 28 लाख से ज्यादा है। लेकिन हर महीने लाखों उपभोक्ताओं की ओर से बिल का भुगतान नहीं किए जाने से करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ता है। 

वितरण विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जून महीने में केवल 19 लाख ग्राहकों ने ही बिजली बिल का भुगतान किया है। लगभग 9 लाख ग्राहकों ने चालू बिल का भुगतान नहीं किया है। जून महीने में ही बिजली महावितरण का लगभग 10 करोड़ रुपए का बिजली बिल बकाया रह गया है। कल्याण परिमंडल के अधिकारियों की समीक्षा बैठक में मुख्य अभियंता रफीक शेख ने निर्देश दिया कि दो महीने से ज्यादा समय तक बिजली बिल का भुगतान न करनेवाले उपभोक्ताओं का बिजली कनेक्शन खंडित कर दिया जाए।

बता दें कि महावितरण की ओर से कल्याण परिमंडल में 28 लाख 39 हजार ग्राहकों को बिजली सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जून महीने में कुल 870 करोड़ के बिजली बिल भेजे गए थे। लेकिन 9 लाख लोगों ने लगभग 10 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया। मई महीने तक के बकायादारों के कनेक्शन बिजली विभाग ने खंडित कर दिए थे, जिसमें से 16 हजार ग्राहकों ने रिकनेक्शण चार्ज का भुगतान कर कनेक्शन वापस लिए हैं।

बिजली बिलों की रीडिंग समस्या को लेकर अक्सर महावितरण के पास हजारों लोहों की शिकायत दर्ज की जाती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए बिजली वितरण कंपनी ने समांतर रीडिंग लेने का काम शुरू किया है। महावितरण के कर्मचारियों को बिजली ग्राहकों की मीटर रीडिंग लेने का निर्देश दिए गए हैं। महावितरण को इससे मीटर रीडिंग करनेवाले ठेकेदारों की मनमानी पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।

कोकण प्रादेशिक विभाग, कल्याण के उपमुख्य जनसंपर्क अधिकारी (प्रभारी) विश्वजीत भोसले ने बताया कि बिजली ग्राहकों की शिकायतों को दूर करने और बिजली सेवाओं को चुस्त दुरुस्त करने के लिए महावितरण की ओर से प्रत्येक अधिकारियों की टेबल ऑडीट की जाएगी। महावितरण के वरिष्ठ अधिकारी अब अपने अधीनस्थ कार्यालयों का औचक निरीक्षण कर सकते हैं। लापरवाही बरतने और उपभोक्ताओं की शिकायतों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों और संबंधित कार्यालय पर विभागीय जांच भी कराई जा सकती है। 

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