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हाईकोर्ट ने निर्भया के अपराधियों को फांसी मसले पर फैसला सुरक्षित रखा

नई दिल्ली (2 फरवरी): निर्भया के अपराधियों को फांसी मसले पर हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। हाईकोर्ट अपने फैसले में तय करेगा कि चारों अपराधियों को एक साथ ही फांसी दी जानी चाहिए या उन्हें अलग-अलग फांसी दी जा सकती है। दिल्ली हाईकोर्ट में निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले में चार दोषियों को फांसी देने पर रोक लगाने वाले निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका पर रविवार को सुनवाई हुई।

सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने कोर्ट को इस मामले की टाइमलाइन बताई। निर्भया के अपराधियों की फांसी मसले पर तुषार मेहता ने दोषियों के क्यूरेटिव याचिका दाखिल करने में देरी के बारे में कोर्ट को जानकारी दी। तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा, ‘समाज और पीड़िता को न्याय के लिए निर्भया के अपराधियों को तुरंत फांसी पर लटकाने की जरूरत है’। उन्होंने बताया कि देरी के लिए निर्भया के अपराधियों ने जान-बूझकर प्रयास किए हैं।

तुषार मेहता ने कहा, ‘ये जानबूझ कर किया जा रहा है। ये न्याय के लिए फ्रस्ट्रेशन की स्थिति है। दोषी मुकेश के लिए कोर्ट में बहस कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने कहा- नियम सबके लिए एक होना चाहिए चाहे दोषी हो या फिर सरकार। अगर निर्भया के अपराधियों को सजा एक साथ दी गयी है तो फांसी भी एक साथ दी जाए, कानून इसका अधिकार देता है। जब निर्भया के आरोपियों का डेथ वारंट एक साथ जारी किया गया तो फांसी अलग कैसे दी जा सकती है।

ध्यान रहे, 16 दिसम्बर 2012 को दक्षिण दिल्ली में 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा से चलती बस में छह व्यक्तियों ने सामूहिक बलात्कार और बर्बर व्यवहार कर बस से नीचे फेंक दिया था। बाद में छात्रा को निर्भया नाम दिया गया था। निर्भया ने 29 दिसम्बर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।

मामले के छह आरोपियों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी। आरोपियों में एक नाबालिग भी शामिल था जिसे एक किशोर न्याय बोर्ड ने दोषी ठहराया था और उसे तीन वर्ष बाद सुधारगृह से रिहा कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने 2017 के अपने फैसले में दोषियों को दिल्ली उच्च न्यायालय और निचली अदालत द्वारा दी गई फांसी की सजा बरकरार रखी थी।

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